क्यों डोनाल्ड ट्रंप को तड़पा रहे हैं पुतिन?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होने वाली दूसरी मुलाकात की तैयारियों को रोक दिया है. 6 दिन पहले ही ट्रंप ने कहा था कि वे हंगरी के बुडापेस्ट में पुतिन से मिलकर यूक्रेन युद्ध खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं. मंगलवार को पहले रूस ने नकारा और फिर व्हाइट हाउस से घोषणा हुई कि इस बैठक की तैयारियां फिलहाल रोक दी गई हैं.
वैसे तो ट्रंप ने कहा कि वे मीटिंग कैंसिल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि एक बेकार की मीटिंग में समय बर्बाद हो. जब युद्ध मोर्चे पर लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में बातों और मुलाकातों को कोई मतलब नहीं है. हैरानी की बात ये है कि पिछले सप्ताह ट्रंप ने दावा किया था कि पुतिन के साथ उनकी फोन बातचीत हुई है और दोनों नेताओं ने आमने-सामने मुलाकात पर सहमति जताई. उन्होंने ये भी कहा था कि पुतिन झट से बातचीत को तैयार हो गए. फिर अंत में ये क्या हो गया?
रूस का रुख नहीं, प्लान बदल गया
इस बदलाव की बड़ी वजह रूस का कड़ा और अडिग रुख है. सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच फोन पर बातचीत हुई और लावरोव ने बाद में कहा कि रूस का रुख वही है – पहले शांति समझौता, उसके बाद संघर्षविराम. वहीं वॉशिंगटन चाहता है कि युद्ध तुरंत रुक जाए पर पुतिन इसके लिए राजी नहीं हैं. रूस का तर्क है कि यूक्रेन का नाटो में शामिल होना उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है. इसलिए, मॉस्को चाहता है कि यूक्रेन नाटो से दूर रहे, रूसी भाषा बोलने वालों पर प्रतिबंध खत्म हो और नई चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए.
रॉयटर्स के मुताबिक रूस ने अमेरिका को एक निजी संदेश भेजकर दोहराया कि वह यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण चाहता है और किसी भी शांति समझौते के तहत नाटो सैनिकों की तैनाती नहीं चाहता. इस समझौते में यूरोपियन यूनियन भी अपनी भूमिका निभाने लगा और उसने कहा रूस के लड़ाई वहीं रोक देनी चाहिए, जहां वे रुके हैं. इस योजना को यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों ने भी समर्थन दिया लेकिन रूस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यूक्रेन को अपने सैन्य ठिकानों को पूर्वी इलाकों से हटाना होगा.

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