मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा आपराधिक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक ताने-बाने और शादी जैसे पवित्र रिश्ते को झकझोर कर रख दिया है। शहर के झांसी रोड थाना क्षेत्र के नाका चंद्रवदनी इलाके में एक शातिर ‘लुटेरी दुल्हन’ और उसके गिरोह ने मिलकर जबलपुर के एक युवक को अपनी ठगी का शिकार बनाया। इस पूरी साजिश का सबसे खौफनाक पहलू यह रहा कि शादी के मंडप में जिस शख्स ने भाई की भूमिका निभाकर रस्में पूरी कीं, वह असल में दुल्हन का पहला पति था।
फरियादी 35 वर्षीय रतन लाल मूल रूप से जबलपुर का रहने वाला है और वहां एक निजी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में टीम लीडर है। पांच भाइयों के परिवार में काफी समय से किसी की शादी नहीं हो पा रही थी, जिससे पूरा परिवार परेशान था। रतन लाल के पड़ोसी सोनू तिवारी को इस मजबूरी का पता था और उसने इसी का फायदा उठाकर ठग गिरोह के साथ मिलकर एक जाल बुना। ग्वालियर आकर मुलाकात की और दोनों पक्षों की रजामंदी से रिश्ता तय हो गया। बीते 7 मई को पाटनकर चौराहा स्थित सुखसागर होटल में पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ रतन लाल और दीक्षा की शादी धूमधाम से संपन्न हुई, जिसमें पीड़ित परिवार के करीब 7 लाख रुपये खर्च हो गए। शादी में सोनू चौहान की मां माया देवी ने लड़की की मां बनकर कन्यादान किया, जबकि उसकी बहन शिल्पी और जीजा राघवेंद्र भी घराती बनकर शामिल हुए।
विदाई के बाद दुल्हन ससुराल आ गई, लेकिन वह दिन-रात अपने मोबाइल फोन पर किसी के साथ चैट करने में डूबी रहती थी। दुल्हन के इस अजीब बर्ताव से परेशान होकर एक रात पति रतन लाल ने चुपके से उसका व्हाट्सऐप चेक कर लिया, जिसे देखते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। चैट से सनसनीखेज खुलासा हुआ कि भाई बनने वाला सोनू चौहान ही दीक्षा का असली पति है, जिन्होंने साल 2024 में आगरा के आर्य समाज मंदिर में लव मैरिज की थी। यह गिरोह शादी का ढोंग रचकर घर के सारे जेवर और नकदी लूटकर भागने की फिराक में था। पीड़ित परिवार ने सूझबूझ दिखाते हुए दुल्हन को भनक लगे बिना सीधे शनिवार को झांसी रोड थाने लाकर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने मोबाइल स्क्रीनशॉट और शादी के वीडियो को साक्ष्य मानकर जांच शुरू कर दी है।