नई दिल्ली, बीस साल पहले यूपी की राजधानी लखनऊ में एक कवयित्री को उसके घर में गोली मारकर हत्या कर दी जाती है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पुलिस को पता चलता है कि कवयित्री मधुमिता शुक्ला 7 महीने की गर्भवती थीं. सीबीआई जांच होती है और प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया जाता है. बाद में उनकी पत्नी मधुमणि की भी गिरफ्तारी होती हैं. आपराधिक छवि वाले अमरमणि त्रिपाठी पर घर कब्जाने, धमकी देने, किडनैपिंग आदि के भी कई आरोप रहे हैं. बीस साल बाद माफिया पर कार्रवाई के लिए मशहूर यूपी सरकार अमरमणि का माफीनामा स्वीकार कर उन्हें जेल से बाहर लाने में मदद करती है. ऐसे में यूपी सरकार पर आरोप लगना तो तय था.आखिर एक सरकार जो लगातार माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए देश ही दुनिया में लोकप्रिय हो रही है वो अचानक एक सजायाफ्ता के लिए इतनी मेहरबानी पर क्यों उतर आई? जबकि मधुमिता की बहन निधि शुक्ला लगातार अमरमणि की रिहाई का विरोध कर रही हैं. उन्होंने मणि परिवार से अपनी जान का खतरा भी बताया है. तो क्या यह सही कहा जा रहा है कि कांग्रेस के सक्रिय होने से पूर्वी यूपी में ब्राह्णण वोटों के बिखरने का डर सता रहा है बीजेपी को? तो क्या इसलिए बीजेपी अमरमणि त्रिपाठी को मैदान में ला रही है. हालांकि अभी तक कोई ऐसा संकेत नहीं मिला है कि बीजेपी अमरमणि त्रिपाठी को पार्टी में शामिल करने जा रही है. यद्यपि उनके पुत्र अमनमणि लगातार बीजेपी के संपर्क में रहे हैं. आइए देखते हैं कि अमरमणि त्रिपाठी का यूपी में कितना सिक्का चलता रहा है? और भविष्य के चुनावों में बीजेपी के लिए वो किस तरह कारगर साबित हो सकते हैं?