NEW DELHI : ‘हां मैंने सिद्धू मूसेवाला का मर्डर करवाया है… ये कहना है भारत का मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का। एक निजी न्यूज चैनल के साथ हुए एक इंटरव्यू में बराड़ ने पंजाबी गायक मूसेवाला के मर्डर की बात कबूली है। बराड़ ने कहा है कि सलमान खान भी हमारे टारगेट पर है, मौका मिलेगा तो उसे भी जरूर मारेंगे।
बातचीत के दौरान गोल्डी ने कहा- ‘हां मैंने सिद्धू मूसेवाला का मर्डर करवाया है। इसी के साथ ही उसने इसकी वजह का खुलासा भी किया। बराड़ ने सीधे लहज़े में कहा कि हम वो चीज करते ही नहीं जो छुपानी पड़े, हम कोई चोर नहीं हैं जो चोरी करके छुपाएंगे, जो चीज की है उसे छुपाने में कोई हर्ज नहीं है। बहुत सोच समझ के की है, जो हमें नही लगता कि हमने कोई नाजायज काम किया है जो छुपाएं, उसके लिए जो भी कुर्बानी देनी पड़ेगी हम देंगे पर जो जरुरी था हमने कर दिया।
जब रिपोर्टर द्वारा बराड़ से पूछा गया कि उसने मूसेवाला को क्यों मरवाया, जिसके जवाब में बराड़ ने कहा कि मैं अकेला कुछ नहीं हूं करने वाला। सारे भाइयों ने मिलकर किया है। हमारे साथ बहुत बड़ा भाईचारा जुड़ा हुआ है। लॉरेंस ग्रुप-काला जठेड़ी ग्रुप ठीक है, बराड़ ने कहा कि मूसेवाला को मारने का कोई एक-आध रीजन हो तो मैं बताऊं, इसके मल्टीपल रीजन हैं। वो अंहकारी था, बिगड़ा हुआ था, जिसके पास पैसा जरूरत से ज्यादा था, जिसके पास में पॉलिटिकल पावर, पुलिस की पावर जरूरत से ज्यादा थी, जिसका वो मिसयूज़ कर रहा था। उसको सबक सिखाना जरूरी था। उसने हमारे कुछ पर्सनल ऐसे नुकसान किए हैं, कुछ ऐसी गलतियां कर बैठा जो माफी के लायक नहीं थीं, जो हमने सजा देनी थी हमने दे दी। जब सरकार इंसाफ ना करे भाई साहब, जब एक अमीर जिसकी करोड़ों की मंथली इनकम है, जिसके साथ SSP, DGP उठते बैठते हैं, जिसकी ऊपर तक पहुंच है, ऐसे में अपने को कोर्ट से क्या इंसाफ मिलता? तो हमने खुद न्याय कर दिया।
मैं खालिस्तान के साथ सहमत नहीं हूं
खालिस्तानियों के साथ संबंध को लेकर बराड़ ने कहा कि कुछ बंदे हैं जिनकी आइडियोलॉजी इसी खालिस्तान को लेकर है। उनके साथ मेरे पर्सनल रिलेशन किसी पुराने टाइम में रहे हैं, व्यक्तिगत तौर पर रहे हैं पर इसका मतलब ये नहीं है कि मैं उनकी आइडियोलॉजी के साथ सहमत हूं। लॉरेंस भाई साहब हिंदू परिवार से हैं और पंजाब के निवासी हैं, अबोहर में रहते हैं, उनका भी उतना ही हक है पंजाब में जितना हमारा सिखों का। हमने उसको मरवाया जिसने सिख गुरु ग्रंथ साहब के साथ बेअदबी की थी। इसका मतलब ये नहीं है कि हम खालिस्तान के सपोर्ट में हैं। मैं खालिस्तान के साथ सहमत नहीं हूं। कहने को कोई कुछ भी कहता रहे।