एग्जाम में हर एक सेकेंड कीमती होता है. अब छात्र को जितना समय परीक्षा देने के लिए मिलता है उसका इस्तेमाल तो वो करेगा ही. लेकिन साउथ कोरिया के कियोल का यह केस थोड़ा हटकर है, हुआ कुछ यूं कि कक्ष निरीक्षक ने एग्जाम को तय समय से महज 90 सेकेंड पहले खत्म करने का फैसला किया. उसका फैसला एक छात्रा को रास नहीं आया और उसने सरकार पर ही केस कर दिया. खास बात यह है कि अगर अदालत का फैसला स्टूडेंट के फेवर में आता है तो साउथ कोरिया सरकार को 12 लाख रुपए हर्जाने के तौर पर देने होंगे. पीड़ित छात्रों ने दक्षिण कोरिया सरकार ने हर्जाना देने की मांग की है. छात्रों का कहना है कि समय से पहले एग्जाम खत्म करने की वजह से उनका साल भर का नुकसान हुआ है. छात्रों के वकीलों का तर्क है कि भले ही कक्ष निरीक्षक ने टाइम एरर हुआ हो. लेकिन उनके मुव्वकिलों को भारी नुकसान हुआ है. यही नहीं उनके नतीजों पर भी असर पड़ेगा. दक्षिण कोरिया में कॉलेज एडमिशन के लिए होने वाले एग्जाम को सुनेउंग कहा जाता है जिसमें कई विषयों की परीक्षा होती है.