जालंधर (संजय शर्मा \विशाल)- दस के सिक्के को लेकर यहां आम लोगों और दुकानदारों में काफी असमंजस है। आम दुकानों से लेकर सब्जी मंडी, आटो, बस, पेट्रोल पंप पर दस का सिक्का लेने और नहीं लेने को लेकर विवाद होता देखा जा सकता है। लोग इसके अलग-अलग कारण मानते हैं। दुकानदार कहते हैं कि पूरे दिन सामान बेचने का काम है। करियाना या अन्य छोटी दुकानों पर दस रुपये का सिक्का या नोट होना जरूरी है। इन्हीं की बदौलत उनकी दुकानदारी चलती है। लेकिन ग्राहक ही दस के सिक्कों को वापस लेने से इंकार कर देते हैं। इसलिए कई जगहों पर दुकानदार इससे परहेज करते हैं।कुछ उच्च-मध्यम वर्गीय लोग इसका कारण बताते हुए कहते हैं कि जिस तबके को दस का सिक्का प्रभावित करता है वे निम्न या मध्य तबके के लोग हैं, जो दस तो क्या एक रुपये को भी सोच समझ कर खर्च करते हैं। ये लोग इस बात से डरे रहते हैं कि कहीं 10 का सिक्का नकली तो नहीं है। इसलिए वे लेने से ही इंकार कर देते हैं। यही इंकार कहासुनी में बदल जाता है। अब सवाल यह है कि गलती किसकी है। कोई कहता है कि दस के सिक्के को बंद कर देना चाहिए तो कोई बैंकों द्वारा लोगों को जागरूक किए जाने की बात करता है।