सिर पर कर्ज और एक बहन; क्या-क्या छोड़ गया खनौरी बॉर्डर पर मरा किसान युवक

नई दिल्ली, किसान आंदोलन के दौरान मौत का शिकार हुए 21 साल के शुभकरण सिंह गरीब परिवार से थे। वह 8 दिन पहले ही पंजाब के बठिंडा जिले के बालोके गांव से दिल्ली चलो मार्च में शामिल होने निकले थे। बुधवार को हरियाणा में एंट्री वाले खनौरी बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच ऐक्शन में उनकी मौत हो गई। अब तक यह जानकारी नहीं मिल सकी है कि शुभकरण सिंह की मौत किस वजह से हुई है। उनके शव का पोस्टमार्टम भी नहीं हो सका है क्योंकि किसान पहले उनके परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग सरकार से कर रहे हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि शुभकरण सिंह एक गरीब किसान परिवार से थे। शुभकरण सिंह अपने पीछे मानसिक बीमार पिता और पढ़ाई कर रही बहन को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बहन की शादी हो गई और उसके ब्याह के लिए ही परिवार ने कर्ज लिया था, जिसकी बड़ी रकम अब भी बकाया ही है। शुभकरण सिंह का मां का पहले ही निधन हो चुका है। शुभकरण सिंह के गांव के लोगों का कहना है कि परिवार गरीब है। अब किसान आंदोलन का भले ही कुछ भी अंजाम हो, लेकिन शुभकरण सिंह के परिवार ने अपने एकमात्र सहारे को खो दिया है। किसान आंदोलनकारियों का दावा है कि शुभकरण सिंह की मौत हरियाणा पुलिस की ओर से दागे आंसू गैस के गोले से हुई है। उनका कहना है कि आंसू गैस का गोला शुभकरण सिंह के सिर पर गिरा था और उससे मौत हो गई। हालांकि मौत का असली कारण तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा। गौरतलब है कि दिल्ली चलो मार्च का ऐलान करने वाले किसान आंदोलनकारियों को फिलहाल हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर और खनौरी सीमा पर ही रोक रखा है। किसानों ने शुक्रवार तक के लिए आंदोलन को रोक दिया है।

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