NEW YORK : दुनिया में पहली बार सूअर की किडनी को इंसान के शरीर में ट्रांसप्लांट किया गया है। खास बात यह है कि सफलता पूर्वक यह काम भी कर रही है। न्यूयॉर्क शहर के एनवाईयू लैंगोन हेल्थ मेडिकल सेंटर के सर्जनों ने यहर कारनामा किया है। इस सफल प्रत्यारोपण से आने वाले वक्त में मानव अंगों की कमी को दूर किया जा सकता है। अंग की कमी को दूर करने के लिए सूअर के ऊपर काफी दिनों से रिसर्च किया जा रहा था। यह सर्जरी 25 सितंबर 2021 को हुई थी। जिसमें एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (जेनेटिकली मोडिफाइड) डोनर जानवर की किडनी वेंटीलेटर के भरोसे जिंदा एक ब्रेन डेड पेशेंट में लगाई गई। ऐसा करने से पहले मरीज के परिजनों से दो दिन के इस एक्सपेरिमेंट के लिए रजामंदी ली गई थी और परिवार ने भी मेडिकल एडवांसमेंट के नाम पर इसके लिए इजाजत दे दी थी। लांगोन स्थित न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय स्थित ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट के निदेशक रॉबर्ट मोंटगोमरी ने एक इंटरव्यू में कहा, किडनी ने ठीक उसी तरह से काम किया, जिस तरह से इसे करना चाहिए। किडनी ने गंदगी को हटाया और मूत्र बनाया। इस किडनी ने क्रिएटिनिन अणुओं की संख्या को कम करने में मदद की। किडनी ट्रांस्पलांट से पहले मरीज का क्रिएटिनिन स्तर जो अधिक था, जिसे इस ट्रांसप्लांट किडनी ने कम करने में मदद की। करीब दो घंटे तक चली इस सर्जरी में रॉबर्ट का साथ उनके कई अन्य साथियों ने दिया। उन्होंने सुअर से ली गई किडनी को मरीज की रक्त वाहिकाओं से जोड़ा, ताकि वे इसकी जांच कर सकें और बायोप्सी के लिए सैंपल ले सकें।
दरअसल मरीज अपने अंग दान करना चाहता था, लेकिन परिवार को उस समय निराशा हाथ लगी जब उन्हें बताया गया कि मरीज का अंग दान देने के लिए सही स्थिति में नहीं है। डॉक्टरों ने उन्हें दान करने का एक और तरीका बताया तो उन्होंने चैन की सांस ली। मरीज को वैंटीलेटर से हटा दिया गया और 54 घंटे के टेस्ट के दौरान उसकी मौत हो गई। पहले ही रिसर्च में ये सामने आ चुका है कि सुअर कि किडनी अन्य जीवों को एक वर्ष तक जिंदा रख सकती है। लेकिन यह पहली बार है, जब इसका इस्तेमाल इंसान पर किया गया है। डोनर सुअर ऐसे समूह से संबंध रखता है, जिसकी जेनेटिक एडिटिंग की गई है। जेनेटिक एडिटिंग के जरिए शुगर का प्रोडक्शन करने वाले जीन को बाहर किया गया, जो एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता, जिसके कारण ऑर्गन रिजेक्शन की आशंका बढ़ जाती। इस जीन एडिटिंग को यूनाइटेड थेरेप्टिक की सहायक बायोटेक फर्म रेविविकोर ने किया। रॉबर्ट मोंटगोमरी ने कहा- हालांकि, यह प्रश्न अब भी मौजूद है कि सर्जरी के तीन हफ्ते बाद, तीन महीने बाद या तीन साल बाद क्या होगा। इसका उत्तर सिर्फ तभी मिल सकता है, जब हम इसका ट्रायल जिंदा इंसानों पर करें। लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमें बताता है कि कम से कम शुरुआत में तो सुअर की किडनी इंसान में काम करती है।