जालंधर, कांग्रेस और ‘आप’ समेत पूरे विपक्ष ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पास होने से रोककर देश की आधी आबादी के खिलाफ घिनौनी साजिश की है, जो भ्रूण हत्या जैसा पाप है। इसका खामियाजा इन महिला-विरोधी पार्टियों को चुनाव परिणामों के रूप में भुगतना पड़ेगा। ये शब्द केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हैं।
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिराने के लिए विपक्ष द्वारा महिलाओं के अधिकारों पर किए गए हमले के खिलाफ जन-जागरूकता के मद्देनज़र भाजपा ने पूरे देश में जन-आक्रोश अभियान शुरू किया है। इसी के तहत खट्टर और उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य भी जालंधर पहुंचे थे।
श्री खट्टर ने कहा, “कांग्रेस ने अपने दशकों पुराने इतिहास के अनुसार महिलाओं को राजनीतिक और नीति-निर्माण के क्षेत्र में भागीदारी देने के प्रयासों में एक बार फिर बाधा डाली है। यह बिल पास कराना महिलाओं पर कोई एहसान नहीं था, बल्कि उनका अधिकार है।”
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास कराया था, जिसे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू करने का वादा किया गया था। यह बिल सर्वसम्मति से पारित हुआ था, इसलिए इस बार भी विपक्ष से समर्थन की उम्मीद थी।
लेकिन 2021 में कोविड के कारण जनगणना में देरी होने से परिसीमन (डिलिमिटेशन) नहीं हो सका। अब भले ही जनगणना का कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन उसके बाद नए परिसीमन के लिए समय बहुत कम है। इसलिए संवैधानिक संशोधन का बिल लाया गया था, जिसे कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने पास नहीं होने दिया।