
जालंधर,(विशाल)-आंगनवाड़ी मुलाजिम यूनियन पंजाब की तरफ से जिला प्रधान की अध्यक्षता में राज्य सरकार के खिलाफ डीसी दफ्तर के सामने प्रदर्शन किया। जिला प्रधान सरबजीत ने कहा कि सरकार की तरफ से आंगनवाड़ी वर्करों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। वर्कर 46 सालों से काम कर रहे हैं, उन्हें आईसीडीएस स्कीम के तहत 1975 में शून्य से छह साल तक के बच्चों की प्राथमिक देखभाल, गर्भवति और माताओं को नवजन्में बच्चों को अपना दूध पिलाने प्रति जागरूक करने और महिलाओं की सेहत संभाल के लिए रखा गया था।उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय फ्रंट लाइन वर्करों की तरह सभी ने अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस काल के दौरान बुढ़ापा, विधवा, आश्रृतों तक पेंशन पहुंचाना, घर-घर आंगनवाड़ी फीड डालाना आदि के काम किए। इस दौरान कई वर्कर इस महामारी की चपेट में भी आई, फिर भी सरकार की तरफ से उन्हें कोरोना सुरक्षा बीमा तक नहीं दिया। इसके बावजूद उन्हें रोजाना नए फरमानों के तहत काम सौंपे जा रहे हैं, जिसके तहत ही केंद्र सरकार की तरफ से भेजे गए बीज डीसी घनश्याम थोरी को सौंप कर रोष जाहिर किया। उनका कहना है कि पोषण वाटिका लगाने के लिए आंगनवाड़ी वर्करों पर पूरा दवाब डाला जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार के पोषण महाप्रोग्राम में किचन गार्डन मनरेगा की मदद के साथ संयुक्त स्थानों पर लगाए जाने हैं। इनकी देखभाल भी मनरेगा के तहत ही की जानी है। उसके बावजूद बाल विकास प्रोजेक्ट अफसर आंगनवाड़ी वर्करों को यह वाटिका लगाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।20 सितंबर 2017 से स्कूलों में प्री प्राइमरी क्लासें शुरू की गई। आंगनवाड़ी वर्करों के पास यही आखिरी जिम्मेदारी थी और अब उनसे यह भी छीन ली गई है। उनकी मांग है कि आंगनवाड़ी वर्करों को उनकी जिम्मेदारी वापस सौंपी जाए। अगर उनकी मांगें न मानी गई तो दस जून के पंजाब के सभी विधायकों को मांग पत्र देकर रोष जाहिर किया जाएगा। उसके बाद भी उनकी मांगों पर गौर न किया तो संघर्ष की राह पर हजारों वर्कर सड़कों पर उतरेंगे। इस मौके पर पूनम रानी, निरंजन कौर, नीलम, बलविंदर कौर, नरेश, मनजीत कौर, सरबजीत आदि थे।