उम्मीदवार घोषित करने में बीजेपी ने क्यों की जल्दबाजी? जान लीजिए पूरी कहानी

नई दिल्ली, बीजेपी ने चुनाव की घोषणा से पहले ही दिल्ली की सात में से पांच सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान एक सोची समझी रणनीति के तहत किया है। पार्टी को लग रहा है कि उसके इस कदम से न सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए अधिक वक्त मिलेगा, बल्कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए भी पब्लिक के बीच अपनी पहुंच बना सकेंगे। यही नहीं, इसके अलावा पार्टी के सामने इस बार आप और कांग्रेस के गठबंधन की भी चुनौती भी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में अमूमन तीसरे या चौथे फेज में लोकसभा चुनाव होते हैं। ऐसे में आमतौर पर नामांकन पत्र दाखिल होने की शुरुआत में ही उम्मीदवारों के नाम तय होते हैं, लेकिन इस बार बीजेपी के सामने आप और कांग्रेस के गठबंधन की बड़ी चुनौती है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि पिछले लोकसभा चुनाव में अधिकांश सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को 50 फीसदी से अधिक वोट मिले थे, लेकिन उस वक्त कांग्रेस और आप दोनों के ही उम्मीदवार मैदान में थे। इसलिए वोटरों को पहले से ही पता था कि आप और कांग्रेस का वोट बंटेगा, जिसकी वजह से बीजेपी उम्मीदवार जीतेंगे। वोटरों के बीच इसी धारणा से भी बीजेपी उम्मीदवारों को स्विंग वोटरों का फायदा मिला था। लेकिन इस बार आप और कांग्रेस के एकसाथ आने के बाद शायद ये फायदा बीजेपी उम्मीदवारों को न मिले। ऐसे में पार्टी को लग रहा था कि अगर पहले ही उम्मीदवार तय कर दिए जाएं तो उम्मीदवारों को ‘हवा’ बनाने में मदद मिलेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि वैसे भी पहले से ही पार्टी ने तय किया हुआ था कि एंटी इन्कमबेंसी को काउंटर करने के लिए उम्मीदवार बदलने होंगे। जाहिर है कि नए घोषित उम्मीदवार को अधिक वक्त चाहिए होगा, जिससे उम्मीदवार लोगों के बीच अपनी पहचान बना सकें।

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