मुलायम सिंह यादव ने राजनीति के अखाड़े में बहुत ऊंचाई हासिल की, लेकिन उनका अपने पैतृक गांव सैफई से कभी लगाव खत्म नहीं हुआ। होली, दिवाली जैसे अहम पर्वों पर वह गांव जरूर जाते थे और लोगों से उनका कनेक्ट ऐसा था कि सभी से मुलाकात करते थे और समस्याओं को सुनते थे। शायद यही वजह है कि मुलायम सिंह यादव धरतीपुत्र कहलाए। जिस गांव में जन्म लिया, उससे खभी दूर नहीं हो सके। यही नहीं अब वह उसी गांव में पंचतत्व में विलीन होने वाले हैं। इसे भी संयोग ही कहेंगे कि किशोरावस्था के दिनों में वह सैफई के जिस मेलाग्राउंड में अखाड़े में पहलवानी करते थे, वहीं उनका अंतिम संस्कार होना है। यह जमीनी व्यक्तित्व ही शायद मुलायम सिंह यादव होने का अर्थ है।