जालंधर, पंजाब सरकार के निर्देश पर पराली के उचित प्रबंधन के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा विकसित सरफेस सीडर पर किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल ने बताया कि जिले के किसान इस मशीन को सब्सिडी पर लेने के लिए कृषि विभाग के पोर्टल 1grimachinerypb.com पर 10 सितंबर तक आवेदन कर सकते है।
श्री सारंगल ने कहा कि धान की पराली को बिना जलाए व जुताई किए खेतों में रखकर कम लागत पर गेहूं की बिजाई करने के लिए सरफेस सीडर मशीन बनाई गई है। उन्होंने बताया कि इस मशीन की कुल लागत 80,000 रुपये है और यह मशीन किसानों को 50% सब्सिडी पर 40,000 रुपये में दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि इसके इलावा कस्टम हायरिंग सेंटर और सहकारी समितियों को यह मशीन मात्र 16000 रुपये में उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने जिले के किसानों को इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का न्योता दिया।
मुख्य कृषि अधिकारी डा.जसवंत राय ने बताया कि इस मशीन में पारंपरिक बुआई ड्रिल का ऊपरी हिस्सा कटर-कम-स्प्रेडर (बेहतर कटर) पर पाइपों के साथ (बिना स्प्रेडर के) लगाया जाता है। यह मशीन कंबाइन से काटे गए धान के खेत में एक साथ बीज और उर्वरक डालती है और साथ ही खड़े धान के डंठलों को काटकर घोल तैयार करती है। उन्होंने कहा, कटा हुआ पराल बीज को ढक देता है, जो बाद में गीली घास के रूप में काम करता है, खरपतवार को कम करता है और मिट्टी के अनुकूल तापमान को बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभव से यह देखा गया है कि सरफेस सीडर तकनीक से बोए गए गेहूं के गिरने की संभावना कम होती है तथा पराली खेत में ही रह जाने से मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। उन्होंने बताया कि यह मशीन 45 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर के साथ चल सकती है और एक घंटे में 1.5 एकड़ गेहूं की बुआई कर सकती है और इस तकनीक से बोए गए गेहूं की लागत 700 से 800 रुपये आती है।
मुख्य कृषि अधिकारी ने बताया कि पंजाब सरकार ने जिला जालंधर में सतही बीज किसानों को सब्सिडी देने के लिए 275 का लक्ष्य दिया है। उन्होंने कहा कि किसान मुख्य कृषि अधिकारी अथवा ब्लाक कृषि अधिकारी से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान, कृषि इंजीनियर नवदीप सिंह से फोन नंबर 98141-12706 पर संपर्क किया जा सकता है।