दिल्ली में यमुना नदी के खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और इसी के साथ ही लोगों की सांसें भी यहां ऊपर-नीचे होने लगी हैं। दोपहर तीन बजे यमुना नदी का जलस्तर 206.26 मीटर तक पहुंच गया। ओल्ड यमुना ब्रिज (लोहा पुल) के पास यमुना का जलस्तर फिर से बढ़ा हुआ दर्ज किया है। दरअसल कुछ ही दिनों पहले यमुना ने जब रौद्र रूप दिखाया था तब दिल्ली के कई इलाके जलमग्न हो गए थे। यमुना नदी के आसपास निचले इलाके में रहने वाले लोगों को वहां से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। इधर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश के बाद हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से राष्ट्रीय राजधानी के बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों में राहत एवं पुनर्वास के काम पर असर पड़ सकता है। दिल्ली में एक बार फिर बाढ़ की आशंका को देखते हुए आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड ने असुरक्षित और संवेदनशील जगहों को देखते हुए खास इंतजाम किये हैं। पिछली बार पंपों में पानी घुस गया था और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को बंद करना पड़ा था। लेकिन इस बार जल बोर्ड प्रशासन ने पूरी तरह तैयारी कर ली है। लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं और सरकार ने उन लोगों के लिए सभी इंतजाम किये हैं। दिल्ली सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के ऊपरी हिस्सों में भारी बारिश से निचले इलाकों में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर असर पड़ेगा और उन्हें लंबे समय तक राहत शिविरों में रहना पड़ सकता है। इससे शहर में जल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है, जो वजीराबाद पंप हाउस में बाढ़ के कारण चार-पांच दिन तक प्रभावित रही थी और मंगलवार को ही जल आपूर्ति सामान्य हो पाई। पंप हाउस वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला शोधन संयंत्र में अशोधित जल की आपूर्ति करता है। ये संयंत्र शहर को करीब 25 फीसदी जल की आपूर्ति करते हैं।