चंडीगढ़, (R.aajtak.com)-पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) का अध्यक्ष बनने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने जालंधर स्थित सचखंड बलां डेरा जाकर मत्था टेकने को फैसला किया. सचखंड बलां पंजाब के दलित सिख समुदाय का बेहद प्रसिद्ध और जाना माना डेरा है. इस दौरे पर सिद्धू के साथ उनकी करीबी साथी चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Chhani) भी साथ थे, जिन्होंने राज्य में रविदासिया समुदाय के डेरे की राजनीति का महत्व बहुत पहले ही भांप लिया था. सिद्धू और चन्नी के बीच बेहद अच्छी दोस्ती है. चन्नी की राजनीति के इतर बात करें तो उन्हें ज्योतिष में बहुत विश्वास है, जिसमें सिद्धू की भी गहरी आस्था है. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष चाहते थे कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर एक ऐसा व्यक्ति बैठे जो उनके लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता प्रशस्त करें ना कि चुनौती बन जाए. चन्नी (Charanjit Singh Chhani) इस भूमिका के लिए परफेक्ट थे. इसलिए सिद्धू द्वारा सुखजिंदर रंधावा के नाम का विरोध जाने पर कोई हैरानी नहीं चाहिए जिन्हें आलाकमान लगभग मुख्यमंत्री चुन ही लिया था. सिद्धू चाहते थे कि उनका आदमी सरकार चलाए. चमकौर साहिब विधानसभा से तीन बार के विधायक चन्नी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अभियान का खुले तौर पर समर्थन किया था और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने में अहम भूमिका निभाई. चन्नी अमरिंदर के खिलाफ लगातार बयान दे रहे थे. यही नहीं पंजाब कांग्रेस के पद पर सिद्धू की नियुक्ति के बाद किसी भी दौरे पर चन्नी हमेशा उनके साथ ही रहते थे.