रूह अफजा की कहानी भारत की आजादी से भी पुरानी

योग गुरू बाबा रामदेव एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने अपने वीडियो में ‘शरबत जिहाद’ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है. बाबा रामेदव ने दावा किया है कि बाजार में मशहूर शरबत बेचने वाली कंपनी अपने मुनाफे से मस्जिदें और मदरसे बनवा रही है. उन्होंने लोगों को पतंजलि का गुलाब शरबत खरीदने की अपील की है. जाहिर है कि बाबा रामदेव का निशाना हमदर्द के रूह अफजा शरबत की तरफ था, जो सालों से भारत में सबसे ज्यादा पिया जाने वाला शरबत है और खास तौर पर गर्मी के दिनों में इसकी डिमांड और भी ज्यादा बढ़ जाती है.

बाबा रामदेव के इस वीडियो के बाद विवादों में भी घिर गए हैं. सोशल मीडिया पर उनके बयान की काफी चर्चा हो रही है, जिसमें कई लोग बाबा रामदेव की आलोचना भी कर रहे हैं. आइए ऐसे में जानते हैं कि हमदर्द के रूह अफजा शरबत की शुरुआत कैसे हुई और रूह अफजा बनाने वाली हमदर्द लैबोरेट्रीज और बाबा रामदेव की पतंजलि का कारोबार कितना है…

रूह अफजा का अर्थ होता है आत्मा को ताजगी देने वाला. इसकी कहानी भारत की आजादी से भी पुरानी है. साल 1907 में यूनानी हर्बल चिकित्सा और हमदर्द दवाखाना के संस्थापक हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने इस शरबत को इजाद किया था. जानकारी के मुताबिक, गर्मी के दिनो में लोग डिहाईड्रेशन, हीट स्ट्रोक का ज्यादा शिकार होते हैं, ऐसे में हकीम अब्दुल मजीद एक ऐसी दवा बनाना चाहते थे, जिसे लोग गर्मी में भी पी सकें. उन्होंने फलों, जड़ी-बूटियों और फूलों के अर्क से यह अनूठा मिश्रण बनाया, जिसका स्वाद लोगों के दिलोदिमाग पर ऐसा बसा कि यह भारत का सबसे ज्यादा पिया जाने वाला शरबत बन गया.

हमदर्द लेबोरेट्रीज सिर्फ रूह अफजा शरबत के लिए नहीं जानी जाती है, बल्कि यह कंपनी अपने कई उत्पादों के लिए पहचानी जाती है. इसमें सिंकारा, रोगन बाबाद शिरीन, साफी, जोशीना, स्वालीन जैसे उत्पाद शामिल हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो 2016 में रूह अफजा ने करीब 600 करोड़ का कारोबार किया था. वहीं 2018 में हमदर्द लेबोरेट्रीज ने अपने 1000 करोड़ की सेल करने का लक्ष्य रखा था. वहीं अगर पतंजलि की बात करें तो बाबा रामदेव की इस कंपनी के उत्पाद अब भारत में घर-घर तक पहुंच चुके हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पतंजलि ने 2023-24 में अपने कारोबार में 23.15 फीसदी के उछाल के साथ 9,335.32 करोड़ का कारोबार किया था.

 

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