रामायण दुनिया की अकेली कहानी

यह तुलसी ने लिखा था शरद के बखान पर. तुलसी ने सही लिखा- शरद में कुछ बात जरूर है. आते ही मन लउछियाने लगता है. वातावरण उत्सव और उल्लास के गंध से सुशोभित होने लगता है. कानों में रामलीला के संवाद प्रतिध्वनित होने लगते हैं. मन राममय होने लगता है. बचपन लौट आता है. स्मृतियों के कबाड़ पर बैठ जाता हूं.

रामलीलाओं की यादें सताने लगती हैं. रोजी रोटी की व्यस्तताओं के बीच अब रामलीला का मंचन देखने का वक्त तो नहीं मिल पाता है पर मन वहीं रमता है. मैंने बचपन से काशी की इस अनमोल परंपरा को जगह-जगह फलीभूत होते देखा है. रामलीलाओं की शक्ति अपरंपार है. कुछ भी हो, कैसा भी हो, कहीं भी हों पर रामलीलाएं पीछा नहीं छोड़ती हैं.

 

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