इस शुक्रवार रिलीज हुई निर्देशक सिद्धांत राज की फिल्म ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ पिछले कुछ दिनों में काफी चर्चित रही है। संजय मिश्रा जैसे गुणी अभिनेता और महिमा चौधरी सरीखी खूबसूरत अभिनेत्री की अनकन्वेंशनल जोड़ी और फिल्म के शीर्षक दोनों ने दर्शकों में उत्साह जगाया।
उस पर हरफनमौला संजय मिश्रा की मौजूदगी के कारण लगा था कि फिल्म मजेदार होगी, मगर अफसोस कमजोर कहानी और स्क्रीनप्ले के कारण यह एक होलसम एंटरटेनर बनने से चूक जाती है।
कहानी बनारस में रहने वाले तीन पुरुषों के इर्द-गिर्द घूमती है, दुर्लभ प्रसाद (संजय मिश्रा), उसका बेटा मुरली (व्योम यादव) और मुरली के मामा (श्रीकांत वर्मा)। दुर्लभ प्रसाद की पत्नी का कई साल पहले निधन हो चुका है, जबकि मामा के मांगलिक होने के कारण अब तक उनका विवाह नहीं हो पाया है। कहानी में मोड़ तब आता है, जब मुरली को शहर के एक बड़े व्यापारी की बेटी महक (पलक लालवानी) से प्रेम हो जाता है। महक के पिता और परिवार, मुरली के सामने एक अजीब-सी शर्त रख देते है। वे अपनी बेटी की शादी ऐसे परिवार में नहीं करेंगे, जहां कोई महिला सदस्य न हो। घर में कम से कम एक महिला का होना जरूरी है।