हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित की गई है. हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि विनायक चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है. इस दिन भगवान गणेश का व्रत और पूजन किया जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का व्रत और पूजन करने से वालों के धन वैभव और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है. आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं. इस दिन पूजन के समय भगवान गणेश के मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के मंत्रों का जाप से घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 2 मार्च को रात 9 बजकर 1 मिनट पर हो रही है. वहीं इस चतुर्थी तिथि का समापन 3 मार्च को शाम 6 बजकर 2 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 3 मार्च को विनायक चतुर्थी का व्रत रख जाएगा. इस दिन चन्द्रास्त रात 10 बजकर 11 मिनट पर होगा.
ये भगवान गणेश का सबसे सरल मंत्र है. ये मंत्र बहुत प्रभावशाली माना जाता है. मान्यता है कि विनायक चतुर्थी के दिन जो भी विधि-विधान और सच्चे मन से भगवान गणेश के इस मंत्र का जाप कर लेता है उसके जीवन की सारी बाधाएं और परेशानियां दूर हो जाती हैं. घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है. इस मंत्र को विनायक चतुर्थी के दिन 108 बार अवश्य जपना चाहिए.
ये गणेश गायत्री मंत्र है. विनायक चतुर्थी के दिन इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति को भौतीक लाभ होता है. साथ हीआध्यात्मिक प्रगति होती है. इस मंत्र का जाप भी 108 बार जरूर ही करना चाहिए.
ये भगवन गणेश का सिद्धि विनायक मंत्र है. भगवान गणेश को सिद्धि वियानक के नाम से भी जाना जाता है. सिद्धि देवी भगावन गणेश की पत्नी हैं. जो भी विनायक चतुर्थी के दिन इस मंत्र का जाप करता है उसके घर में सुख-समृद्धि रहती है और उसको जीवन में सफलता हासिल होती है.