6 सालों तक भारतीय जेल में बंद रहा अंग्रेज बैरी हल्से

लोगों को उनके अपराध के लिए जेल भेजा जाता है जहां की जिंदगी बेहद मुश्किल होती है. फिल्मों में आपने जो कुछ भी देखा है, वो सही है या नहीं, उसपर हम टिप्पणी नहीं कर सकते, पर हाल ही में एक ब्रिटिश व्यक्ति ने बताया है कि भारतीय जेल में रहने का अनुभव कैसा होता है और उसकी जिंदगी दूसरी कैदियों से कैसे बची! डेली स्टार न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार इंग्लैंड के मैंचेस्टर में रहने वाले बैरी हल्से ने हाल ही में एक किताब लिखी है, जिसका नाम है- नो टेंशन इस किताब के जरिए उसने अपने हैरान करने वाले जेल के अनुभव के बारे में बताया है जो उन्होंने भारत में रहते हुए किया. वेबसाइट के अनुसार बैरी हाल ही में शॉन एटवुड पॉडकास्ट में शामिल हुए थे जहां उन्होंने भारत के जेल के बारे में बताया. बैरी का कहना है कि वो भारत में ही रहता था, जब एक बार उसके एक दोस्त ने नींद की गोलियों का एक बड़ा शिपमेंट पोस्ट के जरिए उसके नाम पर भेज दिया जिसकी वजह से वो फंस गया. उसे 6 साल तक जेल में रहना पड़ा.
इस दौरान उसकी जिंदगी काफी चुनौतियों भरी थी. कैदी उससे दुश्मनी कर चुके थे और उसकी जान के पीछे पड़ गए थे. पर जेल में रहते हुए उसकी दोस्ती संतोष नाम के एक बड़े गुंडे से हो गई जिसने जेल में उसे प्रोटेक्शन दिया. बैरी को अपना अकेलापन दूर करने का एक ही तरीका मिला, अश्लील मैग्जीन्स. संतोष से दोस्ती करने की वजह से, उसके द्वारा मंगाए गए पार्सल की जांच नहीं होती थी और वो आसानी से अश्लील मैग्जीन्स जेल में मंगा लेता था. पर उन मैग्जीन्स को उससे भी ज्यादा उसके साथी कैदी पढ़ा करते थे.
बैरी ने बताया कि कई ऐसे कैदी थे जिन्होंने कभी निवस्त्र लड़कियां नहीं देखी थीं या जो विदेशी मॉडल्स को उन मैग्जीन्स में देखना चाहते थे. वो लोग बैरी से मैग्जीन उधार पर मांगकर ले जाया करते थे. बैरी उन्हें फ्री में ही मैग्जीन दे दिया करते थे. उन्होंने किताब में ये भी खुलासा किया है कि कई बार तो जेल में मौजूद सुरक्षाकर्मी भी उनसे मैग्जीन लेकर जाते थे. उन्होंने बताया कि इसके अलावा जेल की बाकी व्यवस्थाएं बहुत बेकार थीं. वहां लाल चींटियां इतनी ज्यादा थीं कि कई बार कपड़े बिना झाड़े पहनने के कारण वो उनके शरीर पर चढ़ जाती थीं. बहुत बार ऐसा हुआ कि खाने में भी चींटियां दिख जाती थीं पर वो उसे प्रोटीन समझकर खा जाया करते थे.

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