बसपा प्रमुख मायावती का स्टैंड कई सियासी समीकरणों की ओर इशारा

राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल और उनके गनर की प्रयागराज में सरेआम हत्या कर दी गई, जिसे लेकर सूबे की सियासी तपिश बढ़ गई है. आरोप बाहुबली अतीक अहमद और उसके परिवार के ऊपर लगा है. बसपा प्रमुख मायावती अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन को पार्टी से बाहर न निकालने की बात कहकर खुद उनके साथ खड़ी नजर आ रही हैं तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को उमेश पाल के घरवालों के आंसू पोछने के लिए भेजकर राजनीतिक बैलेंस बनाने की कोशिश कर रही हैं. सवाल उठता है कि मायावती की यह सियासी मजबूरी है या उनकी रणनीति का हिस्सा? उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. मायावती का साथ छोड़कर पार्टी के तमाम बड़े नेता चले गए हैं या फिर उन्हें बाहर निकाल दिया गया है. बसपा का वोटबैंक भी खिसकर करीब 13 फीसदी पर पहुंच गया. सूबे में पार्टी का एक ही विधायक है. ऐसे में मायावती यूपी की सियासी पिच पर एक बार फिर से दलित-मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग का समीकरण बनाने में जुटी हैं.

 

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