कैबिनेट पद के लिए पीएम मोदी के फोन पर बोले एस. जयशंकर

नई दिल्‍ली, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि वे नौकरशाहों के परिवार से हैं और 2019 में केंद्रीय मंत्री बनने के रूप में राजनीतिक अवसर उनके पास अप्रत्‍याशित रूप से आया. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि उनके पिता डॉ. के सुब्रह्मण्यम को तत्‍कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने वर्ष 1980 में सत्‍ता में आने के बाद रक्षा उत्‍पादन सचिव पद से हटा दिया था और राजीव गांधी के प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान उनके पिता की अनदेखी करके, किसी जूनियर को कैबिनेट सेक्रेटरी बना दिया गया था. न्‍यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्‍यू में जयशंकर ने भारतीय विदेश सेवा से राजनीति तक के अपने सफर की बात की और कहा कि वह हमेशा सर्वश्रेष्ठ अधिकारी बनने और विदेश सचिव के पद पर पहुंचने के इच्छुक थे. उन्‍होंने कहा कि मैं सर्वश्रेष्‍ठ विदेश सेवा अधिकारी बनना चाहता था. और मेरी राय में आप जो सबसे अच्छा कर सकते हैं उसके मायने विदेश सचिव के रूप में अपनी सेवा को समाप्‍त करना था. हमारे घर में भी ऐसा माहौल था, मैं इसे दबाव नहीं कहूंगा लेकिन हम सभी इस तथ्‍य से वाकिफ थे कि मेरे पापा एक नौकरशाह थे और सेक्रेटरी बन गए थे लेकिन उन्‍हें सेक्रेटरी पद से हटा दिया गया. मेरी राय में वह उस समय 1979 में जनता सरकार में संभवत: सबसे कम उम्र के सचिव बने थे.”जयशंकर ने कहा, “1980 में वे रक्षा उत्‍पादन सचिव थे. इस वर्ष जब इंदिरा गांधी फिर से चुनकर आईं तो वे हटाए जाने वाले पहले सचिव थे. रक्षा महकमे में हर कोई कहेगा कि वे सबसे अधिक जानकार व्‍यक्ति थे.” जयशंकर ने कहा कि उनके पिता बहुत ईमानदार व्‍यक्ति थे, हो सकता है कि यह समस्‍या पैदा हुई हो. मुझे नहीं पता.” डॉ जयशंकर ने कहा, “उसके बाद, वह फिर कभी सचिव नहीं बने. राजीव गांधी काल के दौरान उन्हें अपने से ‘जूनियर’ के लिए हटा दिया गया, जो कैबिनेट सचिव बन गया. यह कुछ ऐसा था जिसे उन्होंने महसूस किया … हमने शायद ही कभी इसके बारे में बात की, इसलिए जब मेरे बड़े भाई सचिव बने तो उन्हें बहुत गर्व महसूस हुआ.” उन्होंने कहा कि पिता के निधन के बाद वे सरकार के सचिव बने.

 

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