विधानसभा चुनाव से पहले बागेश्वर धाम की शरण में कमलनाथ और CM शिवराज

मध्य प्रदेश की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टी और उसके नेता आजकल एक ही गाना गा रहे हैं- ‘विधानसभा चुनाव की नैया बागेश्वर धाम सरकार होंगे खेवैया.’ बागेश्वरधाम सरकार के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के दरबार में टिकट चाहने वाले नेताओं के साथ उनकी कथा कराने वाले मंत्री-विधायकों की लाइन यही बता रही है. नेता मानकर चल रहे हैं कि नए हिन्दू हृदय सम्राट आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) की कृपा, जिस पर हो गई, उसकी चुनावी नैया पार हो जाएगी.
बड़ा सवाल है कि कमलनाथ (Kamal Nath) और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बागेश्वर धाम के शरण में क्यों जा रहे हैं? राजनीतिक गलियारों में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस कवायद से एमपी में कमल खिलेगा या कमलनाथ की सरकार बनेगी?

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तो 13 फरवरी को छतरपुर स्थित बागेश्वरधाम सरकार में अपनी हाजिरी लगा चुके हैं. कांग्रेस की ओर से कहा गया कि आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के आमंत्रण पर कमलनाथ वहां पहुंचे थे. हालांकि, बागेश्वर धाम सरकार के आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के चमत्कार संबंधी विवाद में कमलनाथ ने उनका समर्थन किया था.कमलनाथ जानते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व बड़ा मुद्दा रहेगा. इसी वजह से कमलनाथ मंदिरों और संतों का आशीर्वाद लेने से गुरेज नहीं कर रहे हैं. वहीं, अब चर्चा है कि 18 फरवरी को बागेश्वर धाम सरकार में सामूहिक कन्या विवाह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचने वाले हैं. मुख्यमंत्री शिवराज के साथ तमाम बीजेपी नेता पहले ही आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के चमत्कार की पैरवी कर चुके हैं.

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार रविन्द्र दुबे कहते हैं कि आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री आजकल सनातन धर्म के पोस्टर बॉय हैं. उनके दरबार में हाजिरी देने या फिर उनकी कथा कराने से नेता खुद को बड़ा हिन्दू या सनातनी बताने का यत्न कर रहा है. जैसा माहौल है, उसमें विधानसभा चुनाव में बाकी मुद्दे शांत रहेंगे. वोटर हिन्दू-मुसलमान के राजनीतिक ध्रुवीकरण की चाल में फंसकर मतदान केंद्र तक जाएंगे. प्रदेश की दोनों पार्टीयों के दिग्गज नेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ यह बताने में कोई कसर नहीं रखेंगे कि बागेश्वरधाम सरकार के कौन ज्यादा करीब हैं.बता दें कि साल 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 सीटों पर जीत हासिल करके 15 साल बाद सत्ता में वापस लौटी थी. जबकि, बीजेपी को 109 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. प्रदेश की इन दोनों प्रमुख पार्टियों के अलावा समाजवादी पार्टी को एक सीट बिजावर की मिली थी. वहीं, 4 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे. बहुजन समाज पार्टी ने 2 सीटों पथरिया और भिंड में जीत हासिल की थी.

 

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