फिल्म रिव्यू:मकसद और मुद्दे के दरम्‍यान उलझी हुई है दिल्‍ली की हसीन दिलरुबा की कहानी

जजमेंटल है क्‍या’ और ‘मनमर्जियां’ फेम कनिका ढिल्‍लन की कहानियां परतदार होती हैं। जिनमें फीमेल लीड होती हैं। टैबू सवाल होते हैं उनमें। ‘हसीन दिलरुबा’ का आगाज भी उसी नोट पर होता है। रानी, ऋषभ, नील, पुलिसिया जांच के बीच और बेहतर स्‍क्रीनप्‍ले की दरकार थी, जो फिल्‍म को मोटिव और मुद्दा परक बना सकती थी। यहां यह मकसद और मुद्दे के बीच उलझ कर रह गई है।

 

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