इस्लामाबाद, कहते हैं कि अगर परिवार में कोई सीनियर गलती कर चुका हो तो अन्य लोगों को उससे सबक लेना चाहिए। हालांकि पाकिस्तान के मामले में ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। यहां पर अपने बड़े भाई नवाज शरीफ की गलती से सबक सीखे बिना ही, शाहबाज शरीफ तुर्की पहुंच चुके हैं। यह भी दिलचस्प है कि इससे पहले इसी महीने तुर्की ने शाहबाज की मेजबानी से इंकार कर दिया था। इसके बावजूद वह गुरुवार को तुर्की के लिए रवाना हो गए। अब यह जानना भी दिलचस्प होगा कि आखिर नवाज शरीफ ने वह कौन सी गलती की थी और यह वाकया कब का है?
यह वाकया है साल 1999 का। डिफेंस डॉट पीके पर आमिर खाकवानी ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में नवाज शरीफ का दूसरा कार्यकाल था। इसी साल 17 अगस्त को तुर्की में खतरनाक भूकंप आया था। इसमें अंकारा और इस्तांबुल जैसे शहर बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। उस भूकंप में 18 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और 50 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। भूकंप के तीन दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने तुर्की के अधिकारियों से संपर्क किया और पीएम शरीफ के अंकारा विजिट की इच्छा के बारे में बताया। इसके बाद तुर्की की तरफ से जवाब आया कि वहां का नेतृत्व फिलहाल बचाव कार्य में जुटा हुआ है, इसलिए मेजबानी का समय नहीं है। यह बाद प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी बता दी गई थी।
शरीफ पांच दिन के लिए यात्रा रोकने पर सहमत हो गए। इसके बाद वह तुर्की के दौरे पर इस्तांबुल पहुंचे। इसके बाद वह भूकंप स्थल पर पहुंचे और साथ ही तुर्की नेतृत्व से सहानुभूति भी जताई। इसी दौरान नवाज शरीफ का कबाब प्रेम जाग उठा। असल में नवाज शरीफ को इस्तांबुल के एक खास होटल का कबाब काफी पसंद था। वह जब भी यहां जाते थे, कवाब जरूर खाते थे। इस बार भी उनका मन कबाब खाने के लिए मचल उठा था। हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। अधिकारियों का कहना था कि अगर प्रधानमंत्री होटल में कबाब खाने जाएंगे तो उनके साथ सुरक्षा का लाव-लश्कर भी जाएगा। ऐसे में तुर्की के नेतृत्व को यह कतई अच्छा नहीं लगेगा। वह सोचेंगे कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री हमारा दर्द साझा करने आए हैं या कबाब खाने? इसके बाद शरीफ ने अपना फैसला बदल दिया था।