बीजिंग, एशिया के तीन देश इन दिनों जन्मदर में रिकॉर्ड गिरावट का सामना कर रहे हैं। इन देशों में दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला चीन, तकनीक के महारथी जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। इन तीनों देशों में लोग बच्चे पैदा करने से दूर भाग रहे हैं। जबकि, इन देशों की सरकारें बच्चे पैदा करने पर प्रोत्साहन और सब्सिडी का लालच भी दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन यापन और बच्चों की शिक्षा की उच्च लागत, स्थिर वेतन और विवाह और बच्चों की देखभाल के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण इसके लिए जिम्मेदार हैं। दक्षिण कोरिया, जो दुनिया की सबसे कम प्रजनन दर से जूझ रहा है, उसने 2023 में अपने जनसांख्यिकीय संकट को और भी बदतर होते देखा है। इसके बावजूद यह देश अपने नागरिकों को बच्चे पैदा करने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर का प्रोत्साहन देता है। लेकिन, दक्षिण कोरिया अकेला नहीं है। चीन और जापान सहित कई एशियाई सरकारों ने अपने नागरिकों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए मनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनको असफलता हाथ लग रही है। दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर, जो पहले से ही दुनिया में सबसे कम है, 2023 में गिरकर एक नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। बुधवार को सांख्यिकी कोरिया के आंकड़ों से पता चला है कि एक दक्षिण कोरियाई महिला के प्रजनन जीवन के दौरान अपेक्षित शिशुओं की औसत संख्या 2022 में 0.78 से गिरकर 0.72 हो गई है। 2018 के बाद से, दक्षिण कोरिया आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) का एकमात्र सदस्य रहा है जिसकी दर 1 से नीचे है। लगभग 50 मिलियन नागरिकों वाले इस देश में जन्मों की संख्या भी 7.7 प्रतिशत घटकर केवल 230,000 रह गई है। सांख्यिकी कोरिया में जनसंख्या जनगणना प्रभाग के प्रमुख लिम यंग-इल ने कहा, “नवजात शिशुओं की संख्या, जन्म दर और अपरिष्कृत जन्म दर (प्रति 1,000 लोगों पर नवजात शिशु) सभी 1970 के बाद से सबसे निचले बिंदु पर हैं” जब डेटा संग्रह शुरू हुआ।