शादीशुदा जोड़ों की जिन्दगी में एक वक्त ऐसा आता है जब वे आपस में शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना पाते हैं। शारीरिक सम्बन्ध न बनाने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे एकान्त की कमी, परिवार की जिम्मेदारी, यौनेच्छा में कमी, साथी से दूर रहना या फिर एक उम्र के बाद शारीरिक सम्बन्ध बनाने में आपकी स्वयं की मर्जी का न होना। आम तौर पर यह देखा गया है कि 50 की उम्र पार करने के बाद दम्पत्ति लम्बे समय तक शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाता है। तर्क यह दिया जाता है कि अरे यह कोई उम्र है इस काम की। 20-22 साल के बच्चे हो गए हैं। अच्छा थोड़े लगता है कि हम उनके सामने कमरा बन्द कर लें। वहीं दूसरी ओर यौन विशेषज्ञों का कहना है कि लम्बे समय तक शारीरिक सम्बन्ध न बनाने से शरीर पर अलग-अलग प्रकार का प्रभाव पड़ता है।
यौन संबंध में कमी के कारण व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को भी काफी नुकसान होता है। हालांकि इनका अहसास हमें स्वयं को नहीं होता, लेकिन जो व्यक्ति हमारे सम्पर्क में आते हैं उन्हें इस बात का अहसास हो जाता है कि यह पुरुष/महिला लम्बे समय से अपने पार्टनर से दूर है।
I. लंबे समय तक शारीरिक संबंध ना बनाने पर लिबिडो यानी यौनेच्छा (कामेच्छा) में कमी हो जाती है। नियमित सेक्स सेक्शुअल ड्राइव को बढ़ाने में भी मददगार होता है।
II. चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यौन संबंध बनाने में कमी के कारण शरीर में एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का स्तर कम हो जाता है। यह दोनों हार्मोन तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं।
III. नियमित शारीरिक संबंध ना बनाने पर पार्टनर के साथ रिश्ते पर गहरा असर पड़ता है। हालांकि, यह आपसी समझदारी पर ज्यादा निर्भर करता है।
इन नुकसानों के साथ-साथ इससे कुछ फायदे भी हैं।
I. खुद को और अपने शरीर को समझने का समय मिलता है।
II. असमय गर्भावस्था की चिंता नहीं होती।
III. मूत्र मार्ग संक्रमण का डर नहीं रहता।
लम्बे समय तक शारीरिक सम्बन्ध न बनाने से आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने से व्यक्ति जल्द और बार-बार बीमार पडऩे लगता है। एक अध्ययन में कहा गया है कि जो लोग नियमित सैक्स सम्बन्ध बनाते हैं उनके स्लाइवा में विभिन्न संक्रमण से लडऩे वाली एंटीबॉडीज ज्यादा होती हैं।
शारीरिक संबंध में कमी के कारण महिलाओं के जननांग का स्वास्थ्य गिर जाता है। उसमें रक्त प्रवाह (ब्लड फ्लो) बाधित हो सकता है। इसके अतिरिक्त उनकी कामोत्तेजना में कमी हो जाती है।
बढ़ सकता है दिल के रोगों का खतरा
शारीरिक सम्बन्ध न बनाने की वजह से दिल के रोगों का खतरा बढ़ सकता है। शारीरिक सम्बन्ध शरीर के लिए व्यायाम की तरह होता है, जो शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के स्तर को संतुलित रखता है, जिससे दिल के रोगों का खतरा कम होता है। इंटरकोर्स में कमी के कारण मासिक धर्म में महिलाओं को होने वाले मेस्ट्रुअल क्रैंप से ज्यादा परेशानी हो सकती है। इंटरकोर्स के दौरान महिलाओं के अंदर एंडोर्फिन हॉर्मोन बढ़ते हैं और यूटेराइन कॉन्ट्रैक्शन बढ़ता है।