पंजाब कांग्रेस की आपसी कलह किसी से छिपी नहीं है. पार्टी को सूचित किए बना अलग रैली आयोजित करने की वजह से कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी नेताओं के ही निशाने पर आ गए हैं. पार्टी का एक वर्ग ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी. लेकिन अब जो खबर आ रही है उसके मुताबिक, पार्टी आलाकमान सिद्धू जैसे नेता को खोने के मूड में नहीं हैं. लोकसभा चुनाव जीतने की चुनौती को देखते हुए पार्टी नेतृत्व नवजोत सिद्धू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा.सूत्रों के मुताबिक, राज्य के पार्टी मामलों के प्रभारी देवेन्द्र यादव की ओर से सिद्धू को मौखिक सलाह पहले ही दी जा चुकी है. सूत्रों का कहना है कि सिद्धू का राजनीतिक कद काफी बड़ा है और पार्टी आलाकमान ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिसे उन्हें नुकसान पहुंचे क्योंकि पूर्व में कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ जैसे बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं.
ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं तो उन्हें पार्टी से निकालने जैसा फैसला लेना संभव नहीं है. दरअसल पार्टी आलाकमान ने नेताओं से रूठे नेताओं, पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को मुख्यधारा में वापस लाने को कहा है. कांग्रेस में नवजोत सिद्धू के विरोधियों ने उन पर समानांतर रैलियां करने का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की है. वह पहले ही तीन रैलियों को संबोधित कर चुके हैं और एक जल्द ही मोगा में एक और रैली करने वाले हैं.
नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब मामलों के प्रभारी देवेन्द्र यादव से कहा कि यदि यह अनुशासनहीनता है तो केवल उन पर ही क्यों उंगुली उठाई जा रही है और दूसरों को क्यों बख्शा जा रहा है? सिद्धू ने कहा, ‘बात करते हैं बरगद के पेड़ों की, गमलों में उगने वाले लोगों की. कौड़ी-कौड़ी बिके हुए लोग, समझौता करके घुटनो पे टिके हुए लोग. बरगद की बात करते हैं, गमले में उगे हुए लोग.” सिद्धू अपने विरोधियों के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं.