जिला प्रशासन की अपील का असर, पराली जलाने की बजाय पशुचारे के लिए इस्तेमाल कर रहे किसान

जालंधर (विशाल/रोजना आजतक )-डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी की अपील पर बड़ी संख्या में जिले के किसान धान की पराली को जलाने की बजाय इसके प्रबंधन को लेकर आगे आने लगे हैं। कुछ जागरूक किसानों ने पराली का इस्तेमाल दुधारु पशुओं के चारें के लिए शुरू कर दिया है, जिससे पराली को बेचकर एक तरफ वे पैसे कमा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वातावरण को भी प्रदूषित होने से बचाने में योगदान डाल रहे हैं।गाँव सलेमपुर मसन्दा का किसान जसकरन सिंह अपने गांव के डेयरी वालों और गुज्जर भाईचारे के दुग्ध व्यवासियों को पराली बेचकर आमदनी कर रहे हैं और वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने में जुटे हुए हैं। जसकरन सिंह ने बताया कि ज़िले में कई गऊशालाएं है, जहां फ़सलों के अवशेषों का प्रयोग पशुओं के चारों के लिए किया जा सकता है। इसी तरह गांव बहराम सरिश्ता के किसान प्रितपाल सिंह भी डेयरी का काम करने वाले किसानों को पराली बेचकर अपनी आमदन में विस्तार करने के लिए प्रेरित रहे हैं। उन्होनें कहा कि किसानों को पराली जलाने की बजाय इसका सभ्य प्रबंधन करना चाहिए।गांव सलेमपुर मसन्दा के किसानों से प्रेरणा लेकर दूसरे गांवों के किसान भी पराली जलाने की जगह इसे पशु चारे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। गांव कोटला के जतिन्दर सिंह, गांव तलवंडी के शरनजीत सिंह, गांव और गाँव बुल्लोवाल के बूटाराम पराली को आग न लगाकर इसका प्रयोग अपने पशुओं के चारों के तौर पर कर रहे हैं। डेयरी विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे टुकड़ों वाली 4 क्विंटल पराली अगर 14 किलो युरिया और 200 लीटर पानी के साथ तैयार की जाए तो यह दुधारू पशुओं के लिए बढ़िया ख़ुराक बन जाती है। युरिया के साथ बनाई गई पराली और ज्यादा पौष्टिक होती है और इसे दो हफ़्तों के लिए रखकर इसका प्रयोग पशु चारें के तौर पर किया जा सकता है ,लेकिन गाय के बछडों को यह चारा नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि यह भारी होता है और इसको पचाने में उनको ज्यादा समय लगता है। डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने कहा कि पराली जलाने से होने वाले धुएं के कारण सांस की समस्याएँ बढ़ सकती है और कोविड प्रभावित मरीज़ों की हालत ख़राब हो सकती है। उन्होनें बताया कि धान की पराली जलाने से 70,000 एमजी प्रदूषण कण पैदा होते हैं, जोकि मानवीय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और मिट्टी के पौष्टिक तत्व भी इससे नष्ट हो जाते हैं। इसलिए किसानों को पराली जलाने की जगह इसका सभ्य प्रबंधन करना चाहिए। उन्होनें कहा कि पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए पराली सस्ता और संतुलित चारा है और गौशालाओं के लिए भी यह बढ़िया विकल्प है। मुख्य कृषि अधिकारी डा. सुरिन्दर सिंह ने कहा कि कृषि और किसान भलाई विभाग की तरफ से किसानों को धान की पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिसमें पंचायतों की तरफ से पराली जलाने ख़िलाफ़ मदद की जा रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान दूसरे किसानों को जागरूक करने में योगदान दे रहे हैं।

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