केरल के विधानसभा चुनावों में अब तक ज़्यादातर दो-तरफ़ा मुकाबले देखने को मिले हैं लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में पहली बार एक मज़बूत ‘त्रिकोणीय मुकाबला’ हो सकता है. पिछले दस साल से केरल की सत्ता संभाल रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ़) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ़) के अलावा, इस चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भी पूरी ताक़त से मैदान में उतर आया है.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस को हराने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा के बीच एक ‘गुप्त गठजोड़’ है. वहीं सीपीएम के समन्वयक विजय राघवन ने बीबीसी से कहा कि केरल में जब-जब भाजपा को जीत मिली है, तब-तब वह कांग्रेस की परोक्ष सहमति से ही मिली है, और कांग्रेस ने जो भी चुनावी वादे किए हैं, उन्हें पूरा किया ही नहीं जा सकता.वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार केरल आकर प्रचार कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भाजपा सिर्फ़ 30 सीटों पर ही खास ध्यान केंद्रित कर रही है. उनके मुताबिक, त्रिकोणीय मुकाबला होने के बावजूद राज्य में त्रिशंकु विधानसभा बनने की संभावना नहीं है.केरल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान एक ही चरण में 9 अप्रैल को होगा. 140 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में अंतिम मतदाता सूची के अनुसार क़रीब 2.7 करोड़ मतदाता हैं.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के उस नियम में ढील दी गई है, जिसमें कहा गया था कि कोई नेता मुख्यमंत्री जैसे पद पर दो कार्यकाल से ज़्यादा नहीं रह सकता. इसी वजह से पिनराई विजयन, पूर्व मंत्री शैलजा समेत कई नेताओं को तीसरी बार मौका दिया गया है. पिनराई विजयन को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी बनाया गया है. सोनिया गांधी की तबियत ठीक नहीं होने के कारण, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केरल में ‘पुथुयुग यात्रा’ निकालकर प्रचार किया. प्रियंका गांधी भी प्रचार अभियान में हिस्सा ले रही हैं.