भगवान श्रीकृष्ण को माखन से बचपन से ही गहरा लगाव था. यही कारण है कि उन्हें “माखन चोर” कहा जाता है. जन्माष्टमी के दिन शुद्ध मक्खन बनाकर उसमें मिश्री मिलाकर अर्पित करना आवश्यक माना जाता है. यह भोग न केवल भगवान को प्रसन्न करता है, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है. माखन मिश्री का भोग लगाने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है.
सूखे मेवे शक्ति और स्वास्थ्य के प्रतीक माने जाते हैं. कृष्ण लला को पांच से सात तरह के मेवे, जैसे बादाम, काजू, पिस्ता, किशमिश, अखरोट और चिरौंजी अर्पित करने की परंपरा है. इन मेवों को शुद्ध घी में भूनकर प्रसाद स्वरूप भी दिया जा सकता है. इसके अलावा मेवा पाग, मेवा लड्डू और बर्फी भी भोग में शामिल की जाती है. मेवा का भोग लगाने से परिवार में बल और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है.