आंसू आपके जज्बात बयां करते हैं लेकिन ऐसा मुमकिन है की नियर फ्यूचर में आंखों से निकलने वाली ये बूंदें डॉक्टर्स को वो सारी जानकारी दे सकता है जो एक ब्लड टेस्ट जरिए मिलती है। आंसू, जो कभी सिर्फ इमोशन को बताते थे, अब बायोमेडिकल रिसर्च और नैनो टेक्नोलॉजी की प्रगति के साथ इफेक्टिव डायग्नोस्टिक इक्यूपमेंट के तौर पर पहचाने जा रहे हैं.
खून की तरह, आंसू भी बहुत सारी बायोलॉजिकल जानकारी रखते हैं. डॉ. समीर भाटी ने बताया कि ये पानी, प्रोटीन, एंजाइम, लिपिड और इलेक्ट्रोलाइट्स से बने होते हैं, जो वो “क्रिमसन स्पिरिट” को दिखाते हैं. आंसू को स्टोर करना नॉन-इंवेसिव, पेनलेस और कम से कम इंफेक्टिव है, इस तरह ब्लड टेस्ट के उलट, जिसमें खून निकालने की जरूरत होती है, ये सभी रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है.
इसके अलावा, आंसू के डायग्नोसिस को कॉन्पलेक्स टीयर प्रोफाइट के तेजी से और सटीक एनालिसिस को एग्जिक्यूट करने के लिए एआई तकनीक द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है. ऐसे मशीन-लर्निंग एल्गोरिदम इस तरह टीयर कंपोजीशन में उन पैटर्न को समझ सकते हैं जो खास बीमारियों से जुड़े हैं, जिससे अर्ली डायग्नोसिस और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट में सुविधा मिलती है.