शिवपुराण में बताया गया है कि जो शिव भक्त शिव रात्रि और महाशिवरात्रि पर व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ की भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना करते हैं। वह भक्त पूरे साल भगवान शिव की पूजा का फल उस एक दिन में पा जाता है। इसलिए शिव कृपा की इच्छा रखने वाले शिव भक्तों को शिवरात्रि के दिन व्रत अथवा फलाहार रखकर भगवान भोलेनाथ का व्रत करना चाहिए और रात्रि काल में विशेष रूप से शिवजी की पूजा अर्चना करनी चाहिए। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और पार्वती विवाह संपन्न हुआ था। यह त्योहार उनकी वैवाहिक वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। देवी पार्वती और शिवजी के मिलन के इस उत्सव को पूरे भारत में विशेष धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन सभी लोग व्रत करके शिवजी की आराधना करते हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे किया जाता है शिवरात्रि का व्रत और पूजा व क्या हैं
महाशिवरात्रि का व्रत बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। खासकर कि उन महिलाओं के लिए जो अविवाहित हैं। माना जाता है कि जो कन्याएं शिवरात्रि का व्रत करती हैं उन्हें जल्द ही व्रत का फल मिलता है और उनके विवाह के शीघ्र ही संयोग बन जाते हैं। वहीं विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत करती हैं तो उन्हें चिर सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं और उनके परिवार में खुशहाली रहती है।
माना जाता है कि महाशिवरात्रि के व्रत की शुरुआत त्रयोदशी से ही हो जाती है और इसी दिन से लोगों को शुद्ध सात्विक आहार लेना शुरू कर देना चाहिए। कुछ लोग तो इसी दिन से व्रत का आरंभ कर देते हैं। इसके बाद चतुर्दशी तिथि को पूजा करके व्रत करने का संकल्प लेते हैं। इस दिन शिवजी को भांग, धतूरा, गन्ना, बेर और चंदन अर्पित किया जाता है। वहीं माता पार्वती को सुहागिन महिलाएं सुहाग की प्रतीक चूड़ियां, बिंदी और सिंदूर अर्पित किया जाता है। यदि आप उपवास करते हैं तो पूरे दिन फलाहार ग्रहण करें और नमक का सेवन न करें। यदि किसी वजह से नमक का सेवन करते हैं तो सेंधा नमक का सेवन करें।