जापान, दुनिया भर में क्रिसमस ईसा मसीह के जन्मदिन के सेलिब्रेशन के तौर पर मनाया जाता है. मगर जापान में मा्मला अलग है. जापान में क्रिसमस एक प्रकार से दूसरा वैलेंटाइन डे है. यहां पूरे जोशोखरोश के साथ इस दिन कपल्स-युवा लड़के लड़कियां भरपूर मौज मस्ती करते हैं. ऐसा क्यों है और कब से है124 मिलियन की आबादी वाले देश जापान में यूं तो सबसे ज्यादा सबसे माने जाने वाला धर्म शिंटो है. इसे मानने वालों की आबादी देश की 80 फीसदी है. और ईसाई धर्म मानने वाले 1 फीसदी से भी कम है.
फिर भी यह देश क्रिसमस को पूरे उत्साह से मनाता है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी लोग क्रिसमस को किसी धार्मिक इवेंट के रूप में नहीं देखते हैं बल्कि पश्चिम से आया कोई पॉप-कल्चरल इवेंट मानते हैं जिसमें चमक है, रोशनी है और सांता क्लॉज हैं.जापान में ईसाई धर्म 16वीं शताब्दी के मध्य में कहीं आया लेकिन टोकुगावा युग के दौरान इसे ढाई शताब्दियों तक बड़े पैमाने पर दबा दिया गया. यह दौर था जापान की सख्त सामाजिक व्यवस्था और अलगाववादी नीतियों का. फिर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कहीं जाकर अमेरिकी संस्कृति जापान में फैलनी शुरू हुई और साथ में आया क्रिसमस. मगर यहां यह धीरे धीरे एक अलग अंदाज में ढल गया.