मानव तस्करी के आरोप वाले इस विमान में ज्यादातर यात्री पंजाब, हरियाणा, गुजरात और दक्षिण भारत से हैं। इन्हें छोटे-छोटे बैच में एयरपोर्ट से निकलने की मंजूरी दी गई। कुछ लोग बाहर निकले तो कुछ ट्रांजिट बस लेकर डमेस्टिक टर्मिनल की ओर चले गए। ज्यादातर यात्रियों के पास दो से ज्यादा सामान नहीं था। अभी तक की जांच में सभी 276 लोगों के पास भारतीय पासपोर्ट मिले हैं। 276 यात्रियों के साथ 15 क्रू मेंबर भी देश लौट आए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि भारत लौटे यात्रियों में वह शख्स शामिल नहीं है, जिसने यह प्लेन रोमानिया की एयरलाइंस से किराये पर लिया था। वही शख्स इन यात्रियों को दुबई से प्लेन के जरिए सेंट्रल अमेरिका के निकारागुआ ले जा रहा था। शक है कि निकारागुआ से इन्हें अमेरिका और कनाडा में अवैध रूप से बसाने की योजना थी। दुबई से निकारागुआ जाने वाली एक उड़ान को पिछले हफ्ते फ्रांस में रोक दिया गया था। अधिकारियों ने विमान को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने मानव तस्करी के संदेह में यात्रियों से पूछताछ शुरू की। इस विमान में 303 भारतीय सवार थे। इनमें से 276 यात्री मुंबई लौट आए। फ्रांसीसी जांचकर्ताओं ने चार दिन बाद विमान को उड़ान भरने की अनुमति दी। बाद में वह मुंबई लौट आए। जहाज पर सवार सभी 27 लोगों ने फ्रांसीसी सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और शरण मांगी। उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया। रोमानिया की लीजेंड एयरलाइंस द्वारा संचालित विमान ईंधन भरने के लिए 21 दिसंबर की दोपहर को फ्रांस के वाट्री हवाई अड्डे पर उतरा। फ्रांसीसी जांचकर्ताओं को गुप्त सूचना मिली थी कि विमान में मानव तस्करी हो रही थी। उन्होंने विमान को रोका और यात्रियों से पूछताछ शुरू कर दी। जांच चार दिन तक चली। इस घटना ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था।