डीसी ने सखी -वन स्टाप सैंटर का किया दौरा, बोले- घरेलू हिंसा और शोषण की शिकार औरतें ले सकतीं हैं सेंटर से  मदद

जालंध,(विशाल)- डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने सोमवार को शहीद बाबू लाभ सिंह सिविल अस्पताल में चल रहे सखी -वन स्टाप सैंटर का निरीक्षण किया। सिविल सर्जन डा. बलवंत सिंह और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. परमिन्दर कौर के साथ डिप्टी कमिश्नर ने सेंटर में शैल्टर वार्ड, डाक्टरी सहायता, पुलिस सहायता, कानूनी सहायता /केस प्रबंधन, सायकोसोशल काउंसलिंग और अस्थाई सहायता कमरों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि सैंटर उन औरतों के लिए वरदान साबित हुआ है, जो किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना कर रही थी। उन्होनें बताया कि सैंटर की तरफ से पहले ही दुष्कर्म, घरेलू हिंसा, शारीरिक और मानसिक शोषण, दहेज के 380 पीडितों को सहायता उपलब्ध करवाई है और 360 शिकायतों का काऊंलिंग के द्वारा निपटारा किया है।डिप्टी कमिश्नर ने आगे कहा कि पीड़ित निजी तौर पर या फ़ोन के द्वारा सैंटर तक पहुँच कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि वन स्टाप सैंटर की तरफ से हिंसा से पीड़ित औरतों को निजी और सार्वजनिक स्थानों पर यौन शोषण, शारीरिक या मानसिक कष्ट और अन्य मामलों में उनके हितों की चौकीदारी करने के इलावा सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। थोरी ने कहा कि पीड़ित के नाबालिग होने की स्थिति में जुवेनाईल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2000 और प्रोटैक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सैकशुअल ओफैंस एक्ट, 2012 अधीन स्थापित अथारिटी /संस्थानों के साथ तालमेल करके केस हल किये गए। उन्होंने कहा कि सैंटर का प्रारंभिक उदेश्य पीड़ित औरतों के अधिकारों की चौकीदारी और अथारिटी की तरफ से उपयुक्त सहायता के द्वारा उनको न्याय हासिल करने को यकीनी बनाना है। उन्होंने कहा कि नई इमारत को पंजाब पुलिस की 181 – महिला हैल्पलाइन के साथ वी जोड़ा गया है और सखी वन स्टाप सैंटर को महिला हैल्पलाइन -181 के साथ एकीकृत करने के साथ पीडित औरतों के लिए दूर संचार के द्वारा सेवाओं और ज्यादा पहुंचयोग्य हो जाएंगी। केंद्र की को-आरडीनेटर सन्दीप कौर की तरफ से सूचित किये जाने पर उन्होनें कहा कि वह पुलिस विभाग को सैंटर में महिला मुलाज़िम को तैनात करने के लिए लिखेंगे। इस अवसर पर डीपीयो गुरमिन्दर सिंह रंधावा, ज़िला बाल और सुरक्षा अधिकारी अजय भारतीय, लीगल प्रोबेशन अधिकारी सन्दीप कुमार, बाल सुरक्षा अधिकारी अमनीत कौर, हरनीत कौर और अन्य उपस्थित थे

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