जालंधर ,(विशाल)-कोविड -19 के मरीज़ों की कीमती जान बचाने के लिए आक्सीजन गैस के उचित प्रयोग को यकीनी बनाने के कारण डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने गुरूवार को आधिकारियों को जिले में आक्सीजन की स्पलाई पर 24 घंटे निगरानी रखने के लिए कहा। डिप्टी कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्नरज (आबकारी और जीएसटी) को अपने आधिकारियों की विशेष टीमों का गठन करने के लिए कहा, जिससे अस्पतालों की आक्सीजन गैस की उपलब्धता और स्पलाई की जांच की जा सके। उन्होनें कहा कि सरकार के निर्देशों अनुसार आक्सीजन की स्पलाई अस्पतालों को पहल के आधार पर की जानी है और अस्पतालों की ज़रूरतों पूरी करने के बाद यदि कोई स्टाक बचता है, तो ही छूट दिए 9 उद्योगों को स्पलाई किया जा सकता है। अस्पतालों को दी जा रही कुल स्पलाई और उनके उपभोग, अस्पतालों में आक्सीजन सिलंडरों की कुल माँग और जिले में औद्योगिक इकाईयों में भरे और खाली सिलंडरों की उपलब्धता सहित तीन मुख्य बिंदुयों पर चैकिंग की जानी है। उन्होंने ने कहा कि सभी स्थानीय अस्पतालों की ज़रूरत पूरी करने के बाद ही छूट दिए गए 9 उद्योगों को ही आक्सीजन गैस की स्पलाई करने की इजाज़त देने के लिए सिर्फ़ दो आधिकारियों को ही अधिकारित किया गया है। डीसी की तरफ से स्थानीय पुलिस आधिकारियों को आक्सीजन सिलंडर ले जाने वाले वाहनों की चैकिंग करने के निर्देश दिए गए ,चाहे यह स्पलाई अस्पतालों या अन्य संस्थानों को दी जा रही है। उन्होनें कहा कि यदि वाहन सहायक कमिश्नर हरदीप सिंह और डिप्टी डायरैक्टर स्थानीय निकाय सरकारें विभाग दरबारा सिंह से बिना लिखित मंजूरी के उद्योगों को आक्सीजन गैस की स्पलाई करते हुए देखा गया, तो ऐसे मामलों में सख़्त कानूनी कार्यवाही की जायेगी। डिप्टी कमिश्नर ने प्राईवेट अस्पतालों के लिए नियुक्त किये नोडल अधिकारियों को तुरंत अपने नियत किये अस्पतालों के साथ संपर्क करने और उनको अपनी बैड सामर्थ्य का कम से कम 75 प्रतिशत कोविड -19 के मरीज़ों के लिए आरक्षित रखने के लिए कहा। उन्होनें इन नोडल अधिकारियों को इन अस्पतालों में आक्सीजन सिलंडर के प्रयोग की जांच करते हुए अस्पतालों को आक्सीजन कंसनटरेटर खरीदने और पी.एस.ए. आधारित आक्सीजन प्लांट लगाने की अपील करने की भी हिदायत की