टाटा स्टील 14 ट्रांसजेडर्स को एक साथ नौकरी देकर बनी देश की पहली कॉरपोरेट कंपनी

RANCHI : टाटा स्टील ने एक साथ 14 ट्रांसजेडर्स यानी किन्नरों को नौकरी दी है। कंपनी ने गुरुवार को इन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इन्हें झारखंड के रामगढ़ जिला अंतर्गत वेस्ट बोकारो डिवीजन में हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी (एचईएमएम) ऑपरेटर के रूप में तैनात किया जायेगा। संभवत: टाटा स्टील देश की पहली कॉरपोरेट कंपनी है, जिसने एक साथ इतनी संख्या में ट्रांसजेडर्स को नौकरी दी है। इन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किये जाने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में टाटा स्टील के रॉ मैटेरियल्स डिवीजन के वाइस प्रेसिडेंट डी. बी. सुंदर रामम ने कहा, टाटा स्टील मानव मात्र की समानता, विशिष्टता और विविधता में पूर्ण विश्वास रखता है। आज का यह दिन समावेशी विकास की हमारी यात्रा में एक और मील का पत्थर है। टाटा स्टील सभी व्यक्तियों को समान अवसर प्रदान करने वाली नियोक्ता कंपनी के रूप में ट्रांसजेडर्स की विशिष्टता का सम्मान करता है।
टाटा स्टील ने जिन 14 ट्रांसजेंडर्स को नौकरी दी है, उनमें से ज्यादातर रांची, जमशेदपुर और झारखंड के शहरों में रहते हैं। नियुक्ति पत्र लेते हुए ट्रांसजेडर्स ने कंपनी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें आम तौर पर उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है, लेकिन टाटा ने हमें जो स्थान और सम्मान दिया है, उससे हमारा जीवन बदलेगा।
बता दें कि वेस्ट बोकारो में टाटा की कोयला खदानें हैं, जहां पहली तैनाती के दौरान इन ट्रांसजेंडर्स को हेवी अर्थ मूविंग मशीनों के संचालन की ट्रेनिंग दी जायेगी। प्रशिक्षण की अवधि लगभग एक वर्ष होगी। इसके पहले कंपनी ने टाटा स्टील के इसी डिवीजन में 17 महिलाओं को भी एचईएमएम ऑपरेटरों के रूप में शामिल किया था। ये सभी अभी ट्रेनिंग ले रही हैं और अगले साल की शुरूआत में खनन कार्यों में उनकी ड्यूटी लगायी जायेगी। बताया गया कि कंपनी ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स कर्मियों की भागीदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए आगामी 2025 तक25 प्रतिशत विविध कार्यबल का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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