
जालंधर,(विशाल)-तापमान में गिरावट के चलते गेंहू की फसल पर पीली कुंगी के बादल मंडराने लगे हैं। समय रहते इससे निजात पाना संभव है। इस संबंध में किसानों को जागरूक होना जरूरी है। इस बात की जानकारी मुख्य कृषि अधिकारी डा. सुरिंदर सिंह ने दी। उन्होंने खादें, नदीननाशक व कीड़ेमार दवाइयों का इस्तेमाल माहिरों के कहे अनुसार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं की खरीद विभाग के लाइसेंसी डीलर से ही करें और बिल जरूर हासिल करें।जिला जालंधर में गेहूं के तहत 1.71 लाख हेक्टेयर रकबा बीजा गया है। अब मौसम में बढ़ रही ठंड व कोहरे के चलते पीली कुंगी आदि बारे जागरूक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पीली कुंगी हवा से पहाड़ी इलाकों से मैदानी इलाकों में गेहूं को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने किसान भाइयों को जागरूक रहने को कहा। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के लक्षण पत्तों पर पीले पाउडर के रूप में जाहिर होते हैं। ऐसे लक्षण फसल पर नजर आएं तो सिफारिशशुदा जहर नटीवो-75 डब्ल्यूजी 120 ग्राम या परोपीकोनाजोल 25ईसी 200 ग्राम प्रति एकड़ का स्प्रे किया जाए।डा. सुरिंदर ने कहा कि गेहूं व तेल बीज फसलों पर कीड़ेमार दवाइयों के इस्तेमाल से पहले मित्र कीड़ों बारे ध्यान जरुर दें। इस संबंध में कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। डा. सुरिंदर सिंह ने कहा कि इस साल किसानों द्वारा विभाग की बात को मानते हुए ब्लाक जालंधर पूर्वी व पश्चिम अधीन गांवों में बेहद कम किसानों ने पराली को आग लगाई। भविष्य में पराली की संभाल करके हुए फायदों के चलते किसानों ने खेती के अवशेष को जमीन में जोतने का रुझान बढ़ा। उन्होंने कहा कि आलुओं की काश्त करने वाले इस इलाके के किसानों ने धान की पराली को जमीन में जोतकर ही आलुओं की बिजाई की है।