जालंधर, सृष्टिकर्ता भगवान वाल्मीकि जी के पावन प्रकट दिवस को समर्पित बस्तियात क्षेत्र से भव्य एवं विशाल शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में पंजाब के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने विशेष रूप से शामिल होकर भगवान वाल्मीकि जी के चरणों में शीश नवाया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह, श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। शोभायात्रा में शामिल संगत ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर भगवान वाल्मीकि जी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
शोभायात्रा के स्वागत के लिए बस्तियात क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच सजाए गए थे। इन मंचों पर श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने शोभायात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया। जगह-जगह पुष्पवर्षा और धार्मिक जयकारों के बीच शोभायात्रा का स्वागत किया गया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत को विभिन्न स्वागत मंचों पर सम्मानित भी किया गया।
भगवान वाल्मीकि जी का पावन प्रकट दिवस समाज को सत्य, ज्ञान, समानता, सद्भावना और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए प्रासंगिक हैं। ऐसे धार्मिक आयोजनों में संगत की भागीदारी सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत की शोभायात्रा में उपस्थिति ने आयोजन के दौरान विशेष आकर्षण पैदा किया। विभिन्न स्वागत मंचों पर उनका सम्मान किया गया और धार्मिक आयोजन में शामिल संगत के साथ उन्होंने सहभागिता की। शोभायात्रा के माध्यम से भगवान वाल्मीकि जी के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के साथ-साथ उनकी शिक्षाओं और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश भी दिया गया।
इस अवसर पर पार्षद डॉ. मनीष कलरूपिया, पार्षद मुकेश सेठी, पार्षद राज कुमार राजू, पार्षद हरजिंदर सिंह लद्धा, अमन सिंह, पवन हंस, एडवोकेट संदीप कुमार वर्मा, कमल लोच सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
सभी ने भगवान वाल्मीकि जी के पावन प्रकट दिवस के अवसर पर अपनी श्रद्धा व्यक्त की और शोभायात्रा में भाग लेने वाली संगत का उत्साह बढ़ाया। आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता और भाईचारे की भावना भी देखने को मिली।
बस्तियात क्षेत्र से निकली इस भव्य शोभायात्रा ने भगवान वाल्मीकि जी के प्रति श्रद्धा और सम्मान का संदेश दिया। जगह-जगह हुए स्वागत और सम्मान समारोहों ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया। पूरा वातावरण भगवान वाल्मीकि जी के जयकारों और भक्ति भाव से गूंजता रहा।