मीठे और तंबाकू वाले पान पर क्या अलग-अलग लगता है टैक्स

भारत में पान खाने का शौक सदियों से चला आ रहा है. पान के इसी शौक के चलते बॉलीवुड की फिल्मों में इसपर गई गाने भी बन चुके हैं, जिसमें अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन का गाना खाई के पान बनारस वाला… और राज कपूर की फिल्म तीसरी कसम का गाना पान खाए सैयां हमार… बन चुके हैं. अपने जमाने में ये दोनों ही गाने सुपर डुपर हिट भी रहे थे. तब किसे पता था कि एक दिन पान खाने वालों को भी टैक्स देना पड़ जाएगा.

देश में पान का शौक इतना ज्यादा है कि पान खाने वालों तक को नहीं पता है कि वो जो पान खाते हैं, उसके ऊपर सरकार GST टैक्स वसूलती है. बेशक ये टैक्स पान के ऊपर नहीं लगता है, लेकिन पान तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली कई चीज जैसे तंबाकू, मिश्री और गुलकंद पर अलग-अलग कैटेगरी में जीएसटी टैक्स वसूला जाता है.

देश में एक दौर वो भी आया था जब टैक्स के तौर पर पान की पेशगी दी जाती थी. आपको बता दें मुगल पान खाने के बेहद शौकीन थे और आज जो पान का स्वरूप है वो बहुत हद तक मुगलों की देन है. मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां पान के अंदर चूना, सुपारी, लौंग-इलायची का इस्तेमाल करती थी. उस समय यूपी के महोबा स्टेट का पान काफी फेमस हुआ करता था. इसलिए मुगलों को टैक्स के तौर पर पान दिया जाता था.

 

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