अभिषेक जायसवाल/वाराणसी : सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार, एक साल में 24 एकादशियां पड़ती है. अर्थात हर महीने 2 बार एकादशी का व्रत रखा जाता है. पहली कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में. भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को रखने के साथ विधिवत पूजा करने से सभी पापों, समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे मोक्षदा एकादशी कहा जाता हैं उसका अपना विशेष महत्व है. इस साल मोक्षदा एकादशी की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई हैं. अलग-अलग पंचागों में 22 और 23 तारीख को मोक्षदा एकादशी व्रत की बात लिखी है. ऐसे में यदि आप भी मोक्षदा एकादशी की तारीख को लेकर कंफ्यूज है तो आज ही अपना कन्फ्यूजन दूर कर लीजिए. कब होगी एकादशी तिथि की शुरुआत? काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि इस बार 22 दिसंबर 2023 को सुबह 9 बजकर 31 मिनट से एकादशी तिथि की शुरुआत हुई हो रही जो अगले दिन यानी 23 दिसम्बर को सुबह 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. गणेश आपा और ऋषिकेश पंचांग में 22 दिसंबर को ही मोक्षदा एकादशी बताई गई है. वहीं अन्नपूर्णा और आदित्य पंचांग के अनुसार 23 दिसंबर को यह व्रत रखा जाएगा. हालाकिं काशी के विद्वानों का तर्क है कि 22 दिसंबर को पूरे दिन एकादशी तिथि होने के कारण इस दिन ही लोग इस व्रत को रखेंगे और पूजा करेंगे. मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है.मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था. इसी कारण इसे गीता जयंती भी कहा जाता है. मोक्षदा एकादशी के दिन गीता को पढ़ना या सुनाना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से व्यक्ति की हर मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है.