वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि को सबसे शुभ माना गया है। बता दें कि 22 अप्रैल को गुरु ने अपनी स्वराशि मीन से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर लिया है। इस दौरान अखंड साम्राज्य योग का निर्माण हो रहा है। इस योग को धन संपदा, सुख-समृद्धि के लिए जाना जाता है। कहते हैं कि जिन लोगों की कुंडली में ये योग बनता है, उसका भाग्य प्रबल होता है।
फिर भले ही व्यक्ति का जन्म गरीब से गरीब परिवार में भी क्यों न हुआ है। मां लक्ष्मी का आशीर्वाद उनके घर में दिन दुनी और रात चौगुनी तरक्की करते हैं। कुंडली में इस योग का प्रभाव 75 साल तक रहता है। कहते हैं -जिस व्यक्ति की कुंडली में ये योग बनता है, उनकी कुंडली से सारे बुरे योग समाप्त हो जाते हैं।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव और गुरु बृहस्पति के गोचर से अखंड साम्राज्य योग बन चुका है। 17 जनवरी को शनि अपनी स्वराशि कुंभ में प्रवेश कर चुके हैं और 22 अप्रैल को गुरु के मेष में प्रवेश करने से इस योग का निर्माण हुआ है।