अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण का संयोग,जानें कब मनाएं दिवाली और करें लक्ष्‍मी पूजा

इस बार अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण का संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि दो दिन अमावस्या तिथि होने से सूर्य ग्रहण की पूर्व संध्या पर महालक्ष्मी पूजा कर दीपावली  का पर्व मनाया जाएगा। इसके अगले दिन सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पूर्व सुबह से सूतक लगेगा। दिनभर मंदिरों के पट बंद रहेंगे। शाम को सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की साफ-सफाई करके पट खोले जाएंगे और शयन आरती के पश्चात फिर मंदिर बंद होंगे।महामाया मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार 25 अक्टूबर को सुबह 5.51 बजे से ग्रहण का सूतक लगेगा इसलिए 24 अक्टूबर की रात्रि में ही महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा। ग्रहण काल से पहले सूतक के दौरान पूजा घर अथवा मंदिरों में देव प्रतिमाओं का स्पर्श नहीं करना चाहिए। रात्रि में दीपावली पूजन के बाद सूतक लगने से पहले पूजा घर में रखे गए जेवर, रुपये को उठा लें और पूजा घर में पर्दा लगा लें। सूतक लगने से पहले तक पूरी रात माँ महालक्ष्मी जी की पूजन कर सकते है। सूतक व ग्रहण काल मे देवमूर्ति का स्पर्श निषेध माना गया है। इसलिये सूतक लगने के पहले ही पूजन स्थल पर रखे जेवर गहने नगद राशि आदि को उठा कर सुरक्षित जगह पर रख लेवें , पूजन स्थल में पर्दा लगा कर रख देवें।सूर्यग्रहण के समय मंत्र जप-ध्यान करने का विशेष महत्व है। ग्रहण के दौरान जाप करने का कई गुणा फल मिलता है। ग्रहण का मोक्ष होने के पश्चात स्नान करके, जनेऊ, कलाई में बंधी मौली बदलकर पूजा घर की सफाई करके पूजन, आरती करें। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए। इस दौरान जितने अन्न का सेवन किया जाता है, उतने वर्ष तक अरुन्तुद नरक में वास करना पड़ता है। केवल बाल, वृद्ध, गर्भवती को ग्रहण के डेढ़ प्रहर यानी साढ़े चार घंटे पहले भोजन करने की छूट है।

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