नई दिल्ली, अडानी ग्रुप (Adani Group) करीब 7 महीने में दूसरी बार आरोपों के घेरे में है. हिंडनबर्ग के बाद अब बुधवार को नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने अडानी ग्रुप पर एक रिपोर्ट जारी कर कई खुलासे किए हैं. वैसे अधिकतर आरोप वही हैं, जो हिंडनबर्ग ने भी लगाए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि गलत तरीके से शेयरों की कीमत बढ़ाई गई हैं. अडानी ग्रुप का भी बयान आ चुका है, अडानी ग्रुप ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि OCCRP ने हिंडनबर्ग के आरोपों को ही दोहराने का काम किया है. हालांकि गुरुवार को अडानी ग्रुप के सभी शेयरों में दबाव देखने को मिल रहा है. हिंडनबर्ग के बारे में हर किसी को पता है कि वो एक शॉर्ट सेलिंग फर्म है, जो गिरते शेयरों पर दांव लगाकर कमाई करता है. लेकिन अबकी बार अडानी ग्रुप पर OCCRP ने आरोप लगाए हैं. हर कोई जानना चाह रहा है कि ये कहां की एजेंसी है और इसका अडानी मामले से क्या लेना-देना है? बता दें, ये भी विदेशी फर्म है, और हिंडनबर्ग भी विदेशी है. इस बीच जैसे ही OCCRP ने अडानी ग्रुप पर सवाल उठाए, हिंडनबर्ग अपनी पीठ थपथपाने लगा. वहीं नए खुलासे को लेकर भारत के राजनीतिक गलियारों में हलचलें तेज हो गई हैं.
– भारत में नागरिकता संशोधन कानून और कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने को लेकर जॉर्ज सोरोस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा था. सोरोस का आरोप था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है.
– इसी साल जनवरी में जब हिंडनबर्ग से अडानी ग्रुप पर सवाल उठाया तो हाथ सेंकने के लिए जॉर्ज सोरोस भी सामने आ गए थे. जॉर्ज सोरोस ने अडानी मुद्दे के बहाने फिर पीएम मोदी पर निशाना साधा. सोरोस ने दावा किया था कि अडानी के मुद्दे पर भारत में एक लोकतांत्रिक परिवर्तन होगा.
– वैसे जॉर्ज सोरोस बेतुके बयान देने में भी पीछे नहीं रहते हैं. बीते दिनों उन्होंने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक नहीं हैं. मोदी के तेजी से बड़ा नेता बनने के पीछे अहम वजह मुस्लिमों के साथ की गई हिंसा है.
– इससे पहले 2020 में जॉर्ज ने कहा था कि मोदी के नेतृत्व में भारत तानाशाही व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ये बयान उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिया था. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का भी खुलकर विरोध किया था.