जालंधर, (संजय शर्मा)-दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने बिधिपुर में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया। जिसमें श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी त्रिनैना भारती ने बताया कि इस भौतिक संसार में हर जीवन में अशांति का माहौल है। यह बेचैनी दुनिया के किसी भी भोग से दूर नहीं हो सकती। ज्ञान के अभाव में जीव राग-द्वेष, मोह-माया के गहरे अंधकार में भटक रहा है। जब तक उसे आत्मज्ञान की प्राप्ति नहीं हो जाती, वह इसी प्रकार भटकता रहेगा। साध्वी जी ने बताया कि आज मनुष्य अपने परम लक्ष्य को भूल गया है। उसने अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद को सीमित और कैद कर लिया है। वह अपनी भौतिक आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करने के लिए सांसारिक वस्तुओं के अधिग्रहण में पूरी तरह से तल्लीन है। भौतिक समृद्धि के बावजूद शाश्वत शांति और आनंद उसकी पकड़ से फिसलता जा रहा है। वास्तव में, सच्चा सुख सुन्दर शरीर या भौतिक समृद्धि में नहीं है। यह व्यक्ति की आंतरिक स्थिति पर निर्भर करता है। कितने दुःख की बात है कि मनुष्य के रूप में जन्म लेकर भी हमने आत्मा को जानने का प्रयास नहीं किया।
आत्म-साक्षात्कार एवं ईश्वर-प्राप्ति केवल इस मानव शरीर में ही संभव है। यह भाग्य किसी अन्य प्राणी को प्राप्त नहीं हुआ। इसलिए आज हमें ज्ञान प्राप्ति के प्रयास में जुटने की जरूरत है। यह तब होगा जब हम अपनी ऊर्जा को ईश्वर प्राप्ति की ओर मोड़ेंगे। और यह ‘ब्रह्म-ज्ञान’ की दीक्षा के बाद ही संभव है। पुराण संत द्वारा ब्रह्मज्ञान की दीक्षा लेने पर व्यक्ति भीतर से जागृत हो जाता है और यह लक्ष्य यानि मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में पहला कदम है।