जंग के बीच ऐसा क्या हुआ कि डॉलर के सिर पर बैठ गया रुपया?

ईरान-इजराइल तनाव के बीच एक तरफ तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हुई नजर आ रही है. विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालते हुए दिख रहे हैं. इतना ही नहीं, भारतीय रुपया भी लगातार कमजोर होता हुआ नजर आया. मार्च में तो रुपया 94.83 के स्तर तक गिर गया था. लेकिन अचानक तस्वीर बदली और भारतीय रुपया आज 2 अप्रैल को मजबूती के साथ खुला है. बता दें कि आज रुपया 93.84 प्रति डॉलर के मुकाबले 93.53 प्रति डॉलर पर ओपन हुआ था. इतनी बड़ी रिकवरी से हर कोई हैरान रह गया है.
डॉलर के सिर पर बैठे भारतीय रुपया के पीछे सबसे बड़ा रोल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एक फैसले का रहा है. RBI ने 27 मार्च को बाजार बंद होने के बाद बैंकों के लिए एक नया नियम लागू किया. इस नियम के तहत बैंकों की नेट ओपन पोजीशन (NOP) यानी बैंक कितना डॉलर अपने पास रख सकते हैं. उसे घटाकर सिर्फ 100 मिलियन डॉलर कर दिया गया. पहले यह लिमिट काफी ज्यादा थी, जिससे बैंक बड़ी मात्रा में डॉलर होल्ड कर सकते थे. अब बैंकों को 10 अप्रैल 2026 तक इस नई लिमिट का पालन करना है. इसका मतलब साफ है कि बैंकों को अपने पास रखे अतिरिक्त डॉलर बेचने पड़ेंगे. सीएनबीसी आवाज की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि करीब 30 से 40 अरब डॉलर की पोजीशन कम करनी होगी.
बाजार में डॉलर की मांग घटेगी
इसके अलावा RBI ने कुछ और सख्त कदम भी उठाए. बैंकों को कुछ तरह के फॉरेक्स डील्स (जैसे नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड्स) ऑफर करने से रोका गया और कंपनियों को पुराने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स दोबारा बुक करने की छूट भी नहीं दी गई.

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