5 देशों से भारत को हो रहा करोड़ों का नुकसान, सबसे आगे दक्षिण कोरिया

नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक ने अपने एक हालिया लेख में बताया है कि दुनिया के 5 देशों से स्‍टील का आयात बढ़ने की वजह से भारत को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान होता है. आरबीआई ने अपने बुलेटिन में कहा है कि देश के इस्पात क्षेत्र को 2023-24 और 2024-25 के दौरान प्रमुख वैश्विक इस्पात उत्पादकों के सस्ते आयात और डंपिंग के कारण भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. इससे घरेलू उत्‍पादकों को तो नुकसान होता ही है, देश के निर्यात क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है.
केंद्रीय बैंक के अक्टूबर बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख में कहा गया कि इस्पात आयात में वृद्धि देखी गई है जिसका मुख्य कारण आयात कीमतें कम होना है. इससे घरेलू इस्पात उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. साथ ही इसमें घरेलू इस्पात उत्पादन की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत समर्थन की जरूरत भी बताई गई है. आरबीआई ने ‘स्टील अंडर सीज : अंडरस्टैंडिंग द इम्पैक्ट ऑफ डंपिंग ऑन इंडिया’ शीर्षक वाले लेख में कहा है कि वैश्विक उत्पादकों के सस्ते इस्पात की डंपिंग से घरेलू इस्पात उत्पादन को खतरा हो सकता है.
आरबीआई ने इससे बचने का भी उपाय बताया है. रिजर्व बैंक ने अपनी बुलेटिन में लिखा कि इस नुकसान को उपयुक्त नीतिगत उपायों के माध्यम से कम किया जा सकता है. हाल ही में लगाए गए सुरक्षा शुल्क से आयात डंपिंग के खिलाफ सुरक्षा मिली है और आयात में गिरावट आई है. भारत ने अपनी खपत की मांग को पूरा करने के लिए इस्पात उत्पादों का जमकर आयात किया. देश के लौह एवं इस्पात आयात में 2024-25 की पहली छमाही में 10.7 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि 2024-25 की दूसरी छमाही में इसमें कमी दर्ज की गई जिसका मुख्य कारण सेफगार्ड शुल्क था.
अंतराष्ट्रीय बाजार में इस्पात की कम कीमतों से भारत ने 2023-24 में अपने इस्पात आयात में 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की. भारत अपने कुल आयात का लगभग 45 फीसदी इस्पात का आयात दक्षिण कोरिया (आयात हिस्सेदारी 14.6 फीसदी), चीन (9.8 फीसदी), अमेरिका (7.8 फीसदी), जापान (7.1 फीसदी) और ब्रिटेन (6.2 फीसदी) से मंगाता है. लेख में कहा गया कि 2024-25 के दौरान चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और वियतनाम से इस्पात आयात में वृद्धि हुई है.

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