शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद संकट में घिरे गौतम अडानी समूह को लेकर रेटिंग एजेंसी फिच ने एक बार फिर टिप्पणी की है। फिच रेटिंग्स ने कहा कि अडानी समूह की कंपनियों को भारतीय बैंकों का कर्ज इतना अधिक नहीं है कि उनके ऋण पोर्टफोलियो के लिए कोई ठोस जोखिम पैदा हो। क्या कहा एजेंसी ने: फिच रेटिंग्स ने कहा- अडानी समूह को भारत के बैंकों का कर्ज अपने-आप में इतना अधिक नहीं है कि बैंकों के ऋण प्रोफाइल को किसी तरह का ठोस जोखिम पैदा हो सके। बैंकों की रेटिंग इस उम्मीद पर आधारित होती है कि उन्हें कर्ज फंसने की स्थिति में जरूरत पड़ने पर असाधारण सरकारी समर्थन मिल जाएगा। फिच के मुताबिक अगर अडानी समूह के बड़े हिस्से के तनावग्रस्त होने की काल्पनिक स्थिति में भी भारतीय बैंकों का कर्ज जोखिम प्रबंधन-योग्य होगा और इन बैंकों की रेटिंग पर भी उसका कोई प्रतिकूल परिणाम नहीं होगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारतीय बैंकों की कुल उधारी में अडानी समूह की सभी कंपनियों की हिस्सेदारी 0.8-1.2 प्रतिशत है जो कि कुल इक्विटी का करीब 7 से 13 प्रतिशत है। हालांकि फिच ने कहा कि अडानी समूह से संबंधित कुछ ऐसे गैर-पोषित कर्ज हो सकते हैं जिनकी जानकारी नहीं दी गई हो। लेकिन रेटिंग एजेंसी को ऐसी होल्डिंग के वितरित कर्ज की तुलना में कम ही रहने की उम्मीद है। आपको बता दें कि इससे पहले फिच रेटिंग्स ने तीन फरवरी को भी कहा था कि अडानी समूह की कंपनियों एवं शेयरों से संबंधित उसकी रेटिंग पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट का तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा।